बिहार कृषि विश्वविद्यालय में प्रोफेसर पद को लेकर विवाद गहराया, निदेशक (योजना) डॉ. अरुण कुमार से मांगे गए नियुक्ति संबंधी दस्तावेज

बिहार कृषि विश्वविद्यालय में प्रोफेसर पद को लेकर विवाद गहराया, निदेशक (योजना) डॉ. अरुण कुमार से मांगे गए नियुक्ति संबंधी दस्तावेज

बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर में निदेशक (योजना) डॉ. अरुण कुमार के प्रोफेसर पद को लेकर विवाद गहरा गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनके प्रोफेसर पद से संबंधित नियुक्ति प्रक्रिया और सेवा अभिलेखों की जांच शुरू करते हुए उनसे कई महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा है। प्रशासन के इस कदम के बाद विश्वविद्यालय परिसर में मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अंतिम निर्णय केवल उपलब्ध दस्तावेजों और प्रचलित नियमों के आधार पर ही लिया जाएगा।

प्रोफेसर पद से जुड़े दस्तावेज तलब

विश्वविद्यालय प्रशासन ने डॉ. अरुण कुमार से प्रोफेसर पद पर नियुक्ति से संबंधित सभी आधिकारिक रिकॉर्ड प्रस्तुत करने को कहा है। प्रशासन द्वारा जिन दस्तावेजों की मांग की गई है, उनमें संबंधित भर्ती विज्ञापन या अधिसूचना की प्रति, आवेदन से जुड़े अभिलेख, साक्षात्कार का कॉल लेटर, साक्षात्कार की तिथि का विवरण, प्रोफेसर पद पर नियुक्ति अधिसूचना तथा वेतन निर्धारण (पे-फिक्सेशन) आदेश शामिल हैं।

इन दस्तावेजों को निर्धारित समय सीमा के भीतर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे, ताकि नियुक्ति प्रक्रिया का सत्यापन किया जा सके।

डॉ. अरुण कुमार ने रखा अपना पक्ष

प्रशासन के पत्र के जवाब में डॉ. अरुण कुमार ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उनकी नियुक्ति बिहार कृषि विश्वविद्यालय में निदेशक (योजना) के पद पर हुई थी। उन्होंने अपने जवाब में उल्लेख किया कि उस समय वे एसोसिएट प्रोफेसर (सह-प्राध्यापक) के पद पर कार्यरत थे तथा उनकी नियुक्ति संबंधित विज्ञापन की शर्तों और निर्धारित नियमों के अनुरूप की गई थी।

उनके इस जवाब के बाद विश्वविद्यालय परिसर में इस बात को लेकर चर्चा तेज हो गई है कि उन्होंने स्वयं अपने पत्र में एसोसिएट प्रोफेसर होने का उल्लेख किया है, जबकि प्रशासन ने उनसे विशेष रूप से प्रोफेसर पद से संबंधित अभिलेख मांगे थे। हालांकि इस विषय पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने अभी कोई आधिकारिक निष्कर्ष जारी नहीं किया है।

विश्वविद्यालय प्रशासन करेगा दस्तावेजों का परीक्षण

सूत्रों के अनुसार, विश्वविद्यालय प्रशासन अब डॉ. अरुण कुमार द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों और सेवा अभिलेखों का परीक्षण करेगा। जांच के दौरान नियुक्ति प्रक्रिया, पदोन्नति, सेवा नियमों तथा विश्वविद्यालय अधिनियम के प्रावधानों का भी परीक्षण किया जाएगा। यदि किसी स्तर पर अतिरिक्त जानकारी की आवश्यकता होगी तो संबंधित अभिलेख भी मंगाए जा सकते हैं।

कुलपति ने कहा— नियमों के अनुसार होगा निर्णय

पूरे मामले पर बिहार कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय किसी भी मामले में केवल नियमों और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर ही निर्णय लेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय में सभी अधिकारियों और शिक्षकों पर समान नियम लागू होते हैं तथा किसी भी निर्णय में पारदर्शिता और विधिक प्रक्रिया का पूरा पालन किया जाएगा।

फिलहाल जांच प्रक्रिया जारी

फिलहाल यह मामला दस्तावेजों के सत्यापन और प्रशासनिक जांच के चरण में है। विश्वविद्यालय की ओर से अभी तक न तो किसी प्रकार की अनुशासनात्मक कार्रवाई की घोषणा की गई है और न ही किसी निष्कर्ष की आधिकारिक पुष्टि की गई है। दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद ही प्रशासन आगे की कार्रवाई या अंतिम निर्णय लेगा।

विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि मामले की जांच निष्पक्ष, तथ्यों और सेवा नियमों के अनुरूप पूरी की जाएगी तथा अंतिम निर्णय आधिकारिक अभिलेखों के आधार पर ही लिया जाएगा।