हल्दीघाटी विजय समारोह में मोहन भागवत का संदेश, बोले- बाहरी और आंतरिक ताकतें भारत को कमजोर करने की कोशिश में

हल्दीघाटी विजय समारोह में मोहन भागवत का संदेश, बोले- बाहरी और आंतरिक ताकतें भारत को कमजोर करने की कोशिश में

राजस्थान के उदयपुर में हल्दीघाटी विजय के 450 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने देशवासियों को सतर्क रहने का संदेश दिया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भारत के विकास और वैश्विक प्रतिष्ठा को प्रभावित करने के लिए बाहरी और आंतरिक दोनों प्रकार की शक्तियां सक्रिय हैं, जो गलत नैरेटिव और भ्रामक सूचनाओं के माध्यम से देश की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रही हैं।

कार्यक्रम हल्दीघाटी युद्ध की 450वीं वर्षगांठ और महाराणा प्रताप की वीरता को समर्पित था। इस दौरान मोहन भागवत ने कहा कि इतिहास केवल अतीत की घटनाओं का संग्रह नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाला माध्यम भी है। उन्होंने युवाओं से इतिहास को तथ्यों के आधार पर समझने और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने का आह्वान किया।

अपने संबोधन में उन्होंने महाराणा प्रताप के संघर्ष, स्वाभिमान और राष्ट्रनिष्ठा का उल्लेख करते हुए कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी उन्होंने आत्मसमर्पण नहीं किया और स्वतंत्रता व सम्मान के लिए संघर्ष जारी रखा। भागवत ने कहा कि आज भी देश के सामने अनेक चुनौतियां हैं और उनसे निपटने के लिए समाज को एकजुटता, साहस और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ना होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत के इतिहास को लेकर कई बार ऐसे नैरेटिव बनाए गए, जिनसे वास्तविक तथ्यों को पीछे धकेल दिया गया। उनके अनुसार समाज को अपने इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को प्रमाणिक स्रोतों के आधार पर समझना चाहिए तथा भ्रम फैलाने वाले प्रयासों से सावधान रहना चाहिए।

हल्दीघाटी का युद्ध 18 जून 1576 को महाराणा प्रताप और मुगल सेना के बीच लड़ा गया था। यह युद्ध भारतीय इतिहास में वीरता, स्वाभिमान और संघर्ष के प्रतीक के रूप में जाना जाता है। इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में आयोजित इस समारोह में विभिन्न सामाजिक संगठनों, इतिहासकारों और बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया।

भागवत के इस संबोधन के बाद उनके बयान राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बन गए हैं। समर्थक इसे राष्ट्रीय चेतना और इतिहास के पुनर्पाठ का संदेश बता रहे हैं, जबकि विभिन्न वर्गों में इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।