योगी सरकार का बड़ा फैसला: यूपी की हर जमीन को मिलेगा भू-आधार, फर्जी रजिस्ट्री पर लगेगी रोक
उत्तर प्रदेश में जमीन और संपत्ति से जुड़ी धोखाधड़ी पर जल्द बड़ा प्रहार होने जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार भूमि एवं संपत्ति प्रबंधन व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में बड़े सुधारों की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने के बाद प्रदेश की हर जमीन और संपत्ति की एक अलग डिजिटल पहचान होगी, जिससे फर्जी रजिस्ट्री, विवादित जमीन की बिक्री और स्वामित्व से जुड़े विवादों पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकेगी।
सरकार का लक्ष्य है कि प्रत्येक भूमि पार्सल को यूनिक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर (ULPIN) यानी 'भू-आधार' प्रदान किया जाए। यह जियो-रेफरेंस्ड डिजिटल पहचान संख्या होगी, जो भूमि के वास्तविक रिकॉर्ड, जीआईएस मैपिंग और सरकारी अभिलेखों से जुड़ी रहेगी। इससे किसी भी जमीन का पूरा विवरण, उसकी स्थिति और वास्तविक मालिक की जानकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आसानी से उपलब्ध हो सकेगी।
संपत्ति पंजीकरण में होंगे बड़े बदलाव
स्टाम्प एवं पंजीकरण विभाग ने संपत्ति पंजीकरण व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव तैयार किए हैं। पंजीकरण अधिनियम, 1908 में संशोधन कर नई धाराएं जोड़ने का प्रस्ताव है, जिसके तहत किसी भी संपत्ति की रजिस्ट्री से पहले उसके स्वामित्व और अधिकारों की अनिवार्य जांच की जाएगी।
इस व्यवस्था से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमीन बेचने, एक ही संपत्ति की कई बार रजिस्ट्री करने और विवादित संपत्तियों के लेन-देन जैसी समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण की उम्मीद जताई जा रही है।
हर संपत्ति को मिलेगी यूनिक प्रॉपर्टी आईडी
प्रदेश सरकार ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की संपत्तियों के लिए यूनिक प्रॉपर्टी आईडी विकसित करेगी। यह आईडी संपत्ति के डिजिटल रिकॉर्ड, जीआईएस मैपिंग और स्वामित्व अभिलेखों से जुड़ी होगी।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वामित्व योजना के तहत तैयार किए जा रहे घरौनी रिकॉर्ड को भी इस प्रणाली से जोड़ा जाएगा, जबकि शहरी क्षेत्रों में नगर निकायों और विकास प्राधिकरणों के माध्यम से यूनिक प्रॉपर्टी आईडी तैयार की जाएगी।
रजिस्ट्रेशन होते ही अपने आप होगा नामांतरण
सरकार नागरिकों को बड़ी राहत देने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण बदलाव करने जा रही है। नई व्यवस्था के तहत संपत्ति का पंजीकरण पूरा होते ही नामांतरण (Mutation) की प्रक्रिया स्वतः शुरू हो जाएगी।
इसके लिए विभिन्न सरकारी विभागों के रिकॉर्ड को एपीआई आधारित डिजिटल सिस्टम से जोड़ा जाएगा, जिससे राजस्व अभिलेख रियल-टाइम में अपडेट होंगे। इससे लोगों को तहसील और अन्य कार्यालयों के बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे तथा समय और धन दोनों की बचत होगी।
बिजली, पानी और टैक्स रिकॉर्ड भी होंगे लिंक
प्रस्तावित सुधारों के तहत संपत्ति कर, बिजली, पानी और सीवर विभागों के रिकॉर्ड को भी कॉमन प्रॉपर्टी आईडी से जोड़ा जाएगा। इससे किसी भी संपत्ति का पूरा डिजिटल डेटा एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेगा और विभिन्न विभागों के बीच डेटा साझा करना आसान हो जाएगा।
सरकार का मानना है कि इससे कर संग्रहण व्यवस्था भी अधिक प्रभावी होगी और संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड में पारदर्शिता बढ़ेगी।
जमीन खरीदने वालों को मिलेगा बड़ा फायदा
नई डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बाद जमीन खरीदने वाले व्यक्ति को किसी संपत्ति का वास्तविक मालिक कौन है, उस पर कोई विवाद या बंधक तो नहीं है और उसका पूरा रिकॉर्ड क्या है, इसकी जानकारी आसानी से मिल सकेगी। इससे संपत्ति खरीदने में होने वाली धोखाधड़ी और कानूनी विवादों की संभावना काफी कम हो जाएगी।
निवेश और डिजिटल गवर्नेंस को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से उत्तर प्रदेश में भूमि प्रबंधन व्यवस्था आधुनिक बनेगी, निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता आएगी। साथ ही यह पहल राज्य में ईज ऑफ लिविंग और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मजबूत करने के साथ-साथ डिजिटल गवर्नेंस को नई दिशा देगी।
यदि यह व्यवस्था पूरी तरह लागू होती है, तो उत्तर प्रदेश देश के उन अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है जहां जमीन और संपत्ति का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल पहचान के साथ सुरक्षित और पारदर्शी रूप से उपलब्ध होगा।
news desk MPcg