उज्जैन में ₹2.5 लाख की पोशाक पहनकर निकले भगवान जगन्नाथ, जापानी धागों और मोतियों से बंगाल के कारीगरों ने तैयार किया दिव्य श्रृंगार
मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में गुरुवार को भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा आस्था, भक्ति और उत्साह के साथ निकाली गई। ढोल-नगाड़ों, भजन-कीर्तन और जय जगन्नाथ के जयघोष के बीच महाप्रभु जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ नगर भ्रमण पर निकले। हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान के रथ की रस्सी खींचकर पुण्य लाभ प्राप्त किया।
इस वर्ष उज्जैन की रथ यात्रा में सबसे खास आकर्षण भगवान जगन्नाथ की विशेष पोशाक रही, जिसे बंगाल के कुशल कारीगरों ने तैयार किया है। इस दिव्य पोशाक की कीमत करीब 2.5 लाख रुपए बताई जा रही है। इसे तैयार करने में जापान से मंगाए गए विशेष धागों और मोतियों का इस्तेमाल किया गया है।
15 दिन के एकांतवास के बाद भक्तों को दर्शन देने निकले महाप्रभु
जगन्नाथ परंपरा के अनुसार स्नान पूर्णिमा के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा 15 दिनों के एकांतवास में रहते हैं। इस दौरान भक्तों को उनके दर्शन नहीं होते हैं।
एकांतवास की परंपरा पूरी होने के बाद भगवान पुनः भक्तों के बीच आते हैं और रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण करते हैं। इसी धार्मिक परंपरा के तहत उज्जैन में भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा निकाली गई।
श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर सुख-समृद्धि, अच्छी बारिश और प्रदेश की खुशहाली की कामना की।
पहली बार तीन अलग-अलग रथों पर विराजे भगवान
उज्जैन के इस्कॉन मंदिर की रथ यात्रा इस बार विशेष रही। पहली बार भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के लिए अलग-अलग पारंपरिक रथ तैयार किए गए।
भगवान बलभद्र — तालध्वज रथ पर विराजमान हुए
देवी सुभद्रा — दर्पदलन रथ पर विराजमान हुईं
भगवान जगन्नाथ — सबसे बड़े नंदीघोष रथ पर सवार हुए
भगवान जगन्नाथ का नंदीघोष रथ करीब 35 फीट ऊंचा है, जो यात्रा का मुख्य आकर्षण रहा।
भक्तों ने रस्सियों से रथ खींचकर भगवान को नगर भ्रमण कराया। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा और आरती कर भगवान का स्वागत किया।
बंगाल के कारीगरों ने तैयार की खास पोशाक
भगवान जगन्नाथ की विशेष पोशाक को तैयार करने के लिए बंगाल के कारीगरों की मदद ली गई। पोशाक में आकर्षक डिजाइन के साथ जापान से मंगाए गए विशेष धागों और मोतियों का इस्तेमाल किया गया है।
मंदिर प्रबंधन के अनुसार, पोशाक की सुंदरता और भव्यता को ध्यान में रखते हुए इसे विशेष रूप से तैयार कराया गया है। भगवान के श्रृंगार में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और डिजाइन को धार्मिक परंपराओं के अनुरूप रखा गया है।
100 साल पुराने लकड़ी के रथ से निकली दूसरी यात्रा
उज्जैन में केवल इस्कॉन मंदिर ही नहीं, बल्कि अन्य मंदिरों से भी भगवान जगन्नाथ की यात्राएं निकाली गईं।
कार्तिक चौक स्थित जगदीश मंदिर से खाती समाज द्वारा निकाली गई रथ यात्रा भी आकर्षण का केंद्र रही। इस यात्रा में करीब 100 साल पुराने लकड़ी के पारंपरिक रथ का उपयोग किया गया।
इस रथ को हजारों श्रद्धालुओं ने मिलकर खींचा। यात्रा में करीब 1200 गांवों से जुड़े श्रद्धालुओं के शामिल होने की जानकारी सामने आई।
मध्य प्रदेश के कई शहरों में दिखा जगन्नाथ भक्ति का उत्साह
भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा केवल उज्जैन तक सीमित नहीं रही। मध्य प्रदेश के कई जिलों में भी भव्य आयोजन किए गए।
महेश्वर में 11वीं बार निकली यात्रा
खरगोन जिले के महेश्वर में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा 11वें वर्ष आयोजित की गई। 15 दिन के एकांतवास के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा रथ पर सवार होकर भक्तों के बीच पहुंचे।
बैंड-बाजों और जयकारों के बीच निकली यात्रा का जगह-जगह स्वागत किया गया।
हरदा में 51 किलो फूलों से सजा रथ
हरदा के प्राचीन जगदीश मंदिर से निकली रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ का रथ विशेष रूप से सजाया गया था। रथ को करीब 51 किलो फूलों से सजाया गया।
भक्तों ने पुष्पवर्षा और आरती के साथ भगवान का स्वागत किया।
बेगमगंज में दिखा राजनीतिक सौहार्द
रायसेन जिले के बेगमगंज में भगवान जगन्नाथ यात्रा से पहले अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेता एक साथ पूजा करते नजर आए।
सिलवानी से कांग्रेस विधायक देवेंद्र पटेल और भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री ठाकुर रामपाल सिंह राजपूत ने एक साथ भगवान जगन्नाथ की पूजा-अर्चना की।
इसके बाद जयकारों और भजन-कीर्तन के साथ यात्रा शुरू हुई।
सुरक्षा व्यवस्था के लिए प्रशासन अलर्ट
रथ यात्रा को देखते हुए प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए। प्रमुख मार्गों पर पुलिस बल तैनात रहा।
श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए यातायात व्यवस्था में भी बदलाव किए गए। मंदिर समितियों और प्रशासन ने श्रद्धालुओं से शांतिपूर्ण तरीके से यात्रा में शामिल होने की अपील की।
जगन्नाथ रथ यात्रा का धार्मिक महत्व
भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा भारत की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में शामिल है। मान्यता है कि इस दिन भगवान स्वयं मंदिर से बाहर निकलकर अपने भक्तों को दर्शन देते हैं।
ओडिशा के पुरी की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा की तरह देशभर के कई शहरों में यह परंपरा श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाई जाती है।
उज्जैन में निकली इस वर्ष की रथ यात्रा में भक्ति, परंपरा और आधुनिक कला का अनोखा संगम देखने को मिला, जहां करोड़ों की आस्था के बीच भगवान जगन्नाथ विशेष पोशाक और भव्य रथ पर सवार होकर भक्तों को दर्शन देने पहुंचे।
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