मुंबई के अल्टामाउंट रोड पर स्थित एंटीलिया केवल एक निजी आवास नहीं, बल्कि आधुनिक भारत की बढ़ती आर्थिक असमानता का प्रतीक बन चुका है। देश के सबसे बड़े उद्योगपति मुकेश अंबानी और उनके परिवार का यह आलीशान घर लगभग 27 मंज़िलों में फैला है और भूकंपरोधी तकनीक से निर्मित है। इसकी अनुमानित लागत 1 से 2 अरब डॉलर के बीच बताई जाती है, जो इसे दुनिया के सबसे महंगे निजी घरों में शामिल करती है।
एंटीलिया को सुचारु रूप से संचालित रखने के लिए करीब 600 से अधिक कर्मचारी तैनात हैं। इनमें हाउसकीपिंग, निजी शेफ, ड्राइवर, माली, सुरक्षा गार्ड, आईटी व तकनीकी विशेषज्ञ और मेंटेनेंस स्टाफ शामिल हैं। कर्मचारियों को उनकी जिम्मेदारी और अनुभव के अनुसार 30 हजार से 2 लाख रुपये प्रति माह तक वेतन मिलता है, जबकि कुछ वरिष्ठ पदों पर इससे अधिक भुगतान किया जाता है।
इस भव्य इमारत में तीन हेलिपैड, निजी थिएटर, जिम, स्पा, योग सेंटर, स्विमिंग पूल, स्नो रूम, मंदिर और मल्टी-लेवल पार्किंग जैसी सुविधाएं मौजूद हैं। 24×7 शिफ्ट सिस्टम में काम करने वाला स्टाफ इसे किसी पांच सितारा होटल जैसा बनाता है। हालांकि, ऐसे उदाहरण यह सवाल भी खड़ा करते हैं कि क्या देश में बढ़ती अमीरी और आम जनता की बुनियादी जरूरतों के बीच की खाई और गहरी होती जा रही है।