राज्यों पर केंद्र की सख्ती, अब गैर-बजटीय उधारी भी कर्ज सीमा में शामिल, बाजार से पैसा उठाना होगा मुश्किल
राज्यों पर केंद्र की सख्ती, अब गैर-बजटीय उधारी भी जुड़ेगी कर्ज सीमा में, बाजार से पैसा जुटाना होगा मुश्किल एफआरबीएम नियमों में बदलाव से राज्यों की उधारी क्षमता घटेगी, झारखंड जैसे राज्यों पर बढ़ेगा वित्तीय दबाव
केंद्र सरकार ने राज्यों की ऋण व्यवस्था को लेकर बड़ा और सख्त कदम उठाया है। अब राज्यों की कर्ज सीमा तय करते समय गैर-बजटीय उधारी को भी शामिल किया जाएगा, जिससे उनकी उधारी क्षमता पहले की तुलना में कम हो जाएगी।
राज्यों के लिए बाजार से कर्ज जुटाना होगा कठिन
नई व्यवस्था के तहत राज्यों के लिए बाजार से कर्ज उठाना पहले से ज्यादा मुश्किल हो जाएगा। वित्तीय अनुशासन को मजबूत करने के उद्देश्य से यह बदलाव किया गया है, जिससे राज्यों की कुल ऋण सीमा पर सीधा असर पड़ेगा।
झारखंड जैसे राज्यों पर बढ़ेगा दबाव
इस निर्णय का सबसे अधिक प्रभाव उन राज्यों पर पड़ सकता है जिन पर पहले से भारी कर्ज है। झारखंड जैसे राज्यों की वित्तीय स्थिति पहले से ही दबाव में है, जहां मौजूदा कर्ज 1.11 लाख करोड़ रुपये से अधिक बताया जा रहा है।
एफआरबीएम नियमों में बड़ा बदलाव
फिस्कल रेस्पॉन्सिबिलिटी एंड बजट मैनेजमेंट (FRBM) एक्ट के तहत अब गैर-बजटीय उधारी को भी शामिल करने का निर्णय राज्यों की वित्तीय योजना को प्रभावित करेगा। इससे उनकी ऋण लेने की सीमा घटने की संभावना है।
राज्यों के वित्तीय प्रबंधन पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से राज्यों को अपने खर्च और राजस्व के बीच बेहतर संतुलन बनाना होगा। साथ ही वित्तीय अनुशासन को सख्ती से लागू करना होगा, वरना विकास परियोजनाओं पर असर पड़ सकता है।
news desk MPcg