झारखंड का 80 साल पुराना चाईबासा सीमेंट प्लांट होगा बंद, 16 अगस्त से थम जाएगा उत्पादन; 74 कर्मचारियों पर पड़ेगा असर
चाईबासा: झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के औद्योगिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय अब समाप्त होने जा रहा है। झींकपानी स्थित अदाणी एसीसी लिमिटेड के चाईबासा सीमेंट वर्क्स को 16 अगस्त 2026 से स्थायी रूप से बंद करने का निर्णय लिया गया है। करीब आठ दशक पुराने इस संयंत्र की बंदी से न केवल यहां कार्यरत कर्मचारियों की आजीविका प्रभावित होगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और औद्योगिक गतिविधियों पर भी इसका असर पड़ने की आशंका है।
कंपनी ने औद्योगिक संबंध संहिता , 2020 के तहत केंद्र सरकार को प्लांट बंद करने की औपचारिक सूचना भेज दी है। कंपनी के अनुसार संयंत्र को आर्थिक रूप से संचालित करना अब व्यवहारिक नहीं रह गया है, जिसके चलते यह फैसला लिया गया है।
1946 में हुई थी स्थापना
चाईबासा सीमेंट वर्क्स की स्थापना वर्ष 1946 में हुई थी। यह संयंत्र झारखंड के सबसे पुराने औद्योगिक प्रतिष्ठानों में गिना जाता है और दशकों तक क्षेत्र के औद्योगिक विकास का प्रमुख केंद्र रहा। यहां उत्पादित सीमेंट की आपूर्ति पूर्वी भारत के कई राज्यों तक होती रही है।
बंदी के पीछे ये हैं प्रमुख कारण
कंपनी द्वारा जारी सूचना में प्लांट बंद करने के पीछे कई आर्थिक और तकनीकी कारण बताए गए हैं। इनमें प्रमुख रूप से चूना पत्थर (लाइमस्टोन) के खनिज भंडार का लगभग समाप्त हो जाना, क्लिंकर उत्पादन की बढ़ती लागत, तथा पुराने और कम दक्षता वाले संयंत्र का संचालन महंगा पड़ना शामिल है।
कंपनी का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में उत्पादन जारी रखना आर्थिक रूप से लाभकारी नहीं रह गया है। लगातार बढ़ती उत्पादन लागत और सीमित संसाधनों के कारण संयंत्र की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी प्रभावित हुई है।
74 कर्मचारियों की नौकरी पर असर
संयंत्र बंद होने से यहां कार्यरत 74 कर्मचारियों की सेवाएं सीधे प्रभावित होंगी। हालांकि कंपनी की ओर से कर्मचारियों के पुनर्वास, मुआवजे अथवा अन्य वैकल्पिक व्यवस्थाओं को लेकर अभी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। श्रमिक संगठनों और कर्मचारियों की नजर अब कंपनी और प्रशासन के अगले कदमों पर टिकी हुई है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा प्रभाव
चाईबासा सीमेंट प्लांट केवल एक औद्योगिक इकाई नहीं, बल्कि झींकपानी और आसपास के क्षेत्रों की आर्थिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण आधार रहा है। संयंत्र से जुड़े परिवहन, ठेका कार्य, छोटे व्यवसाय और स्थानीय रोजगार भी इससे प्रभावित होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्लांट बंद होने से क्षेत्र में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसरों पर असर पड़ सकता है।
औद्योगिक विरासत का अंत
करीब 80 वर्षों तक संचालित रहने के बाद इस ऐतिहासिक सीमेंट संयंत्र का बंद होना झारखंड के औद्योगिक परिदृश्य के लिए एक महत्वपूर्ण घटना माना जा रहा है। लंबे समय तक इस प्लांट ने क्षेत्र के विकास, रोजगार सृजन और औद्योगिक उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन संसाधनों की कमी और बढ़ती लागत के चलते अब इसका संचालन बंद करने का निर्णय लिया गया है।
16 अगस्त 2026 से उत्पादन पूरी तरह बंद होने के साथ ही चाईबासा सीमेंट वर्क्स का एक लंबा औद्योगिक सफर इतिहास का हिस्सा बन जाएगा।
news desk MPcg