टेलीग्राम बैन के बीच पावेल ड्यूरोव का बड़ा आरोप, रिलायंस और व्हाट्सऐप को लेकर कही ये बात

टेलीग्राम बैन के बीच पावेल ड्यूरोव का बड़ा आरोप, रिलायंस और व्हाट्सऐप को लेकर कही ये बात

NEET-UG 2026 परीक्षा को लेकर देशभर में चल रही चर्चाओं के बीच टेलीग्राम एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और धोखाधड़ी की आशंकाओं को देखते हुए भारत सरकार ने टेलीग्राम पर अस्थायी रोक लगाने का फैसला लिया है। इसी बीच टेलीग्राम के संस्थापक और CEO पावेल ड्यूरोव ने रिलायंस और फेसबुक (मेटा) समूह को लेकर ऐसे आरोप लगाए हैं, जिन्होंने नई बहस छेड़ दी है।

कौन हैं पावेल ड्यूरोव

पावेल ड्यूरोव रूस के चर्चित टेक उद्यमी और अरबपति कारोबारी हैं। उन्हें टेलीग्राम मैसेजिंग ऐप का संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) माना जाता है। इससे पहले उन्होंने रूस के लोकप्रिय सोशल नेटवर्क VK (VKontakte) की भी स्थापना की थी। वर्ष 2014 में रूस छोड़ने के बाद उन्होंने विदेश में रहना शुरू किया और बाद में संयुक्त अरब अमीरात तथा फ्रांस की नागरिकता प्राप्त की।

दुनियाभर में उन्हें प्राइवेसी और डिजिटल स्वतंत्रता के समर्थक के रूप में जाना जाता है। टेलीग्राम को भी उन्होंने सुरक्षित और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया।

क्या हैं रिलायंस और फेसबुक पर लगाए गए आरोप

पावेल ड्यूरोव ने दावा किया कि भारत में टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध के पीछे रिलायंस समूह और व्हाट्सऐप से जुड़े हितों की लॉबिंग हो सकती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि टेलीग्राम को भारत में कमजोर करने के लिए बड़े कॉर्पोरेट समूहों द्वारा दबाव बनाया गया।

हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में कोई सार्वजनिक सबूत सामने नहीं आया है। रिलायंस समूह की ओर से भी इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।

NEET परीक्षा से कैसे जुड़ा मामला

21 जून को प्रस्तावित NEET-UG 2026 परीक्षा से पहले सरकार को आशंका थी कि टेलीग्राम जैसे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल पेपर लीक या अन्य प्रकार की परीक्षा धोखाधड़ी के लिए किया जा सकता है। इससे पहले मई में आयोजित परीक्षा पर भी पेपर लीक के आरोप लगे थे, जिसके बाद दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया।

इसी पृष्ठभूमि में टेलीग्राम पर अस्थायी रोक लगाने का फैसला चर्चा का विषय बना हुआ है।

फिलहाल क्या स्थिति है

रिलायंस और फेसबुक पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और न ही किसी सरकारी एजेंसी ने इन दावों की पुष्टि की है। मामला फिलहाल चर्चा में है और इस पर विभिन्न पक्षों की प्रतिक्रियाओं का इंतजार किया जा रहा है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म, परीक्षा सुरक्षा और डेटा गोपनीयता को लेकर यह विवाद आने वाले दिनों में और चर्चा का विषय बन सकता है।