मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने पर भोपाल में कांग्रेस का सत्याग्रह, दिग्विजय सिंह ने उठाए बड़े सवाल
मध्य प्रदेश के राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी माहौल गर्माता जा रहा है। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किए जाने के विरोध में गुरुवार को राजधानी भोपाल में कांग्रेस ने बड़ा सत्याग्रह शुरू किया। रोशनपुरा चौराहे स्थित जवाहर भवन के सामने आयोजित इस प्रदर्शन में पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।
सत्याग्रह में कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह समेत बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी मौजूद रहे। कांग्रेस नेताओं ने नामांकन निरस्त किए जाने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया।
दिग्विजय सिंह का हमला, बोले- लोकतंत्र का काला दिन
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि जिस दिन मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किया गया, वह लोकतंत्र के इतिहास का "काला दिन" था। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे मामले में निष्पक्षता नहीं बरती गई और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित किया गया।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि कांग्रेस इस फैसले के खिलाफ संवैधानिक और कानूनी लड़ाई जारी रखेगी तथा सच सामने लाने के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगी।
फर्जी नोटिस के आधार पर कार्रवाई का आरोप
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन एक फर्जी नोटिस के आधार पर रद्द किया गया। उनका दावा है कि जिस याचिका का हवाला दिया गया था, उसे पहले ही वापस लिया जा चुका था, इसके बावजूद उसी नोटिस को आधार बनाकर कार्रवाई की गई।
पार्टी नेताओं का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया संदेहास्पद है और इसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
हाई कोर्ट जाने की तैयारी
कांग्रेस पहले ही संकेत दे चुकी है कि वह नामांकन रद्द किए जाने के फैसले को अदालत में चुनौती देगी। पार्टी की कोशिश है कि राज्यसभा चुनाव की आगे की प्रक्रिया से पहले कानूनी राहत प्राप्त की जाए। इसे लेकर कांग्रेस की कानूनी टीम आवश्यक दस्तावेज तैयार करने में जुटी हुई है।
भोपाल में गरमाई सियासत
मीनाक्षी नटराजन के नामांकन विवाद ने मध्य प्रदेश की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। कांग्रेस इसे लोकतंत्र और चुनावी प्रक्रिया पर हमला बता रही है, जबकि पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर घमासान और बढ़ने की संभावना है।
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