मनेर शरीफ दरगाह की बदहाली पर पटना हाई कोर्ट सख्त, केंद्र सरकार से दो हफ्ते में मांगा जवाब
बिहार के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले मनेर शरीफ दरगाह परिसर की बदहाल स्थिति को लेकर पटना हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। दरगाह के संरक्षण, स्वच्छता, सुरक्षा, सौंदर्यीकरण और समग्र विकास से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने केंद्र सरकार से दो सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस मामले ने राज्य के प्रमुख सूफी धार्मिक स्थल की उपेक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
हाई कोर्ट ने मांगा केंद्र का जवाब
मुख्य न्यायाधीश मीनाक्षी मदन राय और न्यायमूर्ति सोनी श्रीवास्तव की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को दो सप्ताह के भीतर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अगली सुनवाई 13 जुलाई 2026 तय की है।
संरक्षण और विकास की मांग
याचिकाकर्ता मोहम्मद महमूद आलम की ओर से पेश अधिवक्ता संजीव कुमार ने अदालत को बताया कि मनेर शरीफ दरगाह बिहार के सबसे प्रमुख सूफी धार्मिक स्थलों में से एक है, जहां हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसके बावजूद परिसर में स्वच्छता, सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
याचिका में आरोप लगाया गया कि दरगाह के संरक्षण और विकास के लिए अब तक प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं, जिससे इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत प्रभावित हो रही है।
श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की चिंता
दरगाह परिसर की बदहाली को लेकर स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में लंबे समय से नाराजगी है। उनका कहना है कि धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण इस स्थल पर पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं, जबकि इसके विकास से क्षेत्र में पर्यटन और रोजगार दोनों को बढ़ावा मिल सकता है।
अगली सुनवाई पर टिकी नजरें
पटना हाई कोर्ट के निर्देश के बाद अब सभी की निगाहें केंद्र सरकार के जवाब और आगामी सुनवाई पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि अदालत के हस्तक्षेप के बाद मनेर शरीफ दरगाह के संरक्षण और विकास को लेकर ठोस कदम उठाए जा सकते हैं, जिससे इस ऐतिहासिक धरोहर को नई पहचान मिल सके।
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