दिल्ली सरकार का विंटर पॉल्यूशन एक्शन प्लान जारी, बिना PUC नहीं मिलेगा ईंधन; सर्दियों से पहले सख्त तैयारी शुरू
सर्दियों के मौसम में बढ़ने वाले वायु प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने समय से पहले व्यापक विंटर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट फ्रेमवर्क 2026 लागू करने की घोषणा की है। सरकार का उद्देश्य इस बार प्रदूषण बढ़ने से पहले ही रोकथाम के उपाय लागू करना है ताकि राजधानी में हर साल बनने वाली स्मॉग की गंभीर स्थिति को नियंत्रित किया जा सके।
नई योजना के तहत सबसे बड़ा फैसला "नो पीयूसी, नो फ्यूल" नीति को सख्ती से लागू करने का है। अब जिन वाहनों के पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) नहीं होगा, उन्हें दिल्ली के पेट्रोल, डीजल और सीएनजी पंपों पर ईंधन नहीं दिया जाएगा। इस व्यवस्था की निगरानी डिजिटल ट्रैकिंग और कैमरा सिस्टम के जरिए की जाएगी।
सरकार ने घोषणा की है कि 1 नवंबर 2026 से दिल्ली में केवल बीएस-6, सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाणिज्यिक वाहनों को ही प्रवेश मिलेगा, जबकि पुराने प्रदूषण फैलाने वाले व्यावसायिक वाहनों पर प्रतिबंध रहेगा। इसका उद्देश्य वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करना है, जो सर्दियों में दिल्ली की खराब हवा का बड़ा कारण माना जाता है।
योजना में केवल वाहनों पर ही नहीं बल्कि सड़क की धूल, निर्माण गतिविधियों, औद्योगिक उत्सर्जन, कचरा प्रबंधन और बायोमास जलाने जैसे प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। सरकार ने कई संवेदनशील ट्रैफिक हॉटस्पॉट पर जाम कम करने, यांत्रिक सफाई बढ़ाने, पानी के छिड़काव और प्रदूषण नियंत्रण तकनीकों के उपयोग का भी रोडमैप तैयार किया है।
विशेषज्ञों के अनुसार दिल्ली में अक्टूबर से जनवरी के बीच मौसम संबंधी परिस्थितियों, वाहनों के धुएं, सड़क की धूल और आसपास के राज्यों में पराली जलाने जैसी घटनाओं के कारण वायु गुणवत्ता तेजी से खराब हो जाती है। इसी वजह से सरकार ने इस बार सर्दियां शुरू होने से कई महीने पहले ही तैयारी शुरू कर दी है।
दिल्ली सरकार का कहना है कि यह केवल घोषणा नहीं बल्कि सख्त निगरानी और तकनीकी सहायता के साथ लागू होने वाली कार्ययोजना है। यदि इसे प्रभावी ढंग से लागू किया गया तो आने वाले सर्दी के मौसम में राजधानी की हवा को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
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