बिहार के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के लिए सख्ती: 3 बार देर से आने या समय से पहले जाने पर कटेगा एक दिन का वेतन, ई-शिक्षाकोष पोर्टल से होगी ऑनलाइन निगरानी
बिहार के सुपौल जिले के सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की समयबद्ध उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा विभाग ने नई व्यवस्था लागू करने के निर्देश जारी किए हैं। अब सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों का वेतन ई-शिक्षाकोष (e-Shikshakosh) पोर्टल पर दर्ज सत्यापित ऑनलाइन उपस्थिति के आधार पर तैयार किया जाएगा। नई व्यवस्था के तहत यदि कोई शिक्षक तीन बार विद्यालय में देर से पहुंचता है या निर्धारित समय से पहले स्कूल छोड़ता है, तो उसके एक दिन के वेतन की कटौती की जाएगी।
शिक्षा विभाग ने इस संबंध में जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO), प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों (BEO) और सभी सरकारी विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को निर्देश जारी कर व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने को कहा है। यह नियम जिले के सरकारी प्राथमिक, मध्य, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों पर लागू होगा।
ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर दर्ज होगी ऑनलाइन उपस्थिति
नई व्यवस्था के अनुसार शिक्षकों के विद्यालय में प्रवेश और निकास का समय ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज किया जाएगा। इसी रिकॉर्ड के आधार पर मासिक उपस्थिति तैयार होगी और उसी के अनुसार वेतन जारी किया जाएगा।
यदि किसी शिक्षक की उपस्थिति पोर्टल पर दर्ज नहीं होती है, तो संबंधित दिन उसे अनुपस्थित माना जा सकता है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि केवल सत्यापित ऑनलाइन उपस्थिति को ही वेतन भुगतान का आधार बनाया जाएगा।
तीन बार देरी या जल्दी जाने पर एक दिन का वेतन कटेगा
विभागीय निर्देशों के मुताबिक यदि कोई शिक्षक लगातार या अलग-अलग दिनों में तीन बार देर से विद्यालय पहुंचता है अथवा निर्धारित समय से पहले विद्यालय छोड़ता है, तो उसके एक दिन का वेतन काटा जाएगा। इसका उद्देश्य शिक्षकों में समयपालन की आदत विकसित करना और विद्यालयों में नियमित शैक्षणिक गतिविधियां सुनिश्चित करना है।
फर्जी हाजिरी पर भी होगी विभागीय कार्रवाई
शिक्षा विभाग ने ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या फर्जीवाड़े को गंभीर अनियमितता माना है। यदि कोई शिक्षक विद्यालय में उपस्थित हुए बिना फोटो, तकनीकी माध्यम या किसी अन्य तरीके से अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का प्रयास करता है, तो उसके विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
विभाग ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया है कि ऑनलाइन उपस्थिति रिकॉर्ड की नियमित निगरानी की जाए और किसी भी अनियमितता की तत्काल रिपोर्ट जिला स्तर पर भेजी जाए।
प्रधानाध्यापकों और अधिकारियों को दिए गए विशेष निर्देश
नई व्यवस्था के सफल क्रियान्वयन के लिए सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों और विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें प्रतिदिन शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति की निगरानी करनी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी शिक्षक निर्धारित समय पर विद्यालय पहुंचें तथा समय समाप्त होने के बाद ही विद्यालय से जाएं।
यदि किसी विद्यालय में लगातार उपस्थिति संबंधी अनियमितताएं सामने आती हैं, तो संबंधित अधिकारियों से भी जवाब-तलब किया जा सकता है।
शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन लाने की पहल
शिक्षा विभाग का कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य केवल वेतन कटौती करना नहीं, बल्कि सरकारी विद्यालयों में समयपालन, जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। विभाग का मानना है कि जब शिक्षक नियमित रूप से समय पर विद्यालय पहुंचेंगे, तो विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी और सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा।
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी ने क्या कहा?
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) आलोक शेखर आनंद के अनुसार, नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य विद्यालयों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना, समयपालन की संस्कृति विकसित करना और सरकारी स्कूलों में पठन-पाठन की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित अधिकारियों को ऑनलाइन उपस्थिति की नियमित निगरानी और रिपोर्टिंग के निर्देश दिए गए हैं।
पूरे राज्य में लागू होने पर नजर
फिलहाल यह व्यवस्था सुपौल जिले में लागू करने के निर्देश जारी किए गए हैं। यदि इसका प्रभाव सकारात्मक रहता है, तो भविष्य में ऐसी डिजिटल उपस्थिति प्रणाली और कड़े अनुशासनात्मक प्रावधानों को बिहार के अन्य जिलों में भी व्यापक स्तर पर लागू किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, इस संबंध में अभी राज्य सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
मुख्य बिंदु
सुपौल के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के लिए नई उपस्थिति व्यवस्था लागू।
वेतन अब ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर दर्ज सत्यापित ऑनलाइन उपस्थिति के आधार पर मिलेगा।
तीन बार देर से आने या समय से पहले जाने पर एक दिन का वेतन काटा जाएगा।
ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज न होने पर शिक्षक को अनुपस्थित माना जा सकता है।
फर्जी हाजिरी या डिजिटल गड़बड़ी पाए जाने पर विभागीय कार्रवाई होगी।
उद्देश्य सरकारी विद्यालयों में अनुशासन, पारदर्शिता और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाना है।
news desk MPcg