कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को तीसरा गोल्ड: दिलीप गावित ने T47 100 मीटर में बनाया गेम्स रिकॉर्ड; बासिल ने जीता सिल्वर, मुरली श्रीशंकर लगातार दूसरी बार लॉन्ग जंप में दूसरे नंबर पर
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए सातवां दिन शानदार रहा। पैरा एथलेटिक्स के पुरुष T47 100 मीटर फाइनल में दिलीप महादु गावित ने गोल्ड मेडल जीतकर भारत के खाते में तीसरा स्वर्ण पदक जोड़ दिया। गावित ने 10.71 सेकंड के समय के साथ रेस पूरी की और इस प्रदर्शन के साथ गेम्स रिकॉर्ड भी बनाया। इसी रेस में भारत के मोहम्मद बासिल ने 10.83 सेकंड के समय के साथ सिल्वर मेडल जीतकर भारत को 1-2 फिनिश दिलाई।
इसी दिन लॉन्ग जंप में मुरली श्रीशंकर ने 8.09 मीटर की छलांग लगाकर सिल्वर मेडल जीता। यह कॉमनवेल्थ गेम्स में उनका लगातार दूसरा सिल्वर है। 2022 में भी श्रीशंकर ने लॉन्ग जंप में सिल्वर जीता था। इस बार जमैका के तजाय गेल ने 8.15 मीटर के साथ गोल्ड हासिल किया, जबकि श्रीशंकर 8.09 मीटर के साथ दूसरे स्थान पर रहे।
गावित ने 10.71 सेकंड में रेस जीती
पुरुषों की T47 100 मीटर स्पर्धा में दिलीप महादु गावित ने शुरुआत से ही मजबूत प्रदर्शन किया। फाइनल में उन्होंने 10.71 सेकंड का समय निकालकर पहला स्थान हासिल किया। यह उनके लिए गोल्ड मेडल के साथ गेम्स रिकॉर्ड भी रहा।
भारत के ही मोहम्मद बासिल ने 10.83 सेकंड में रेस पूरी कर सिल्वर मेडल जीता। इस तरह एक ही इवेंट में भारत ने गोल्ड और सिल्वर दोनों अपने नाम किए। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार यह T47 100 मीटर में भारत का ऐतिहासिक 1-2 फिनिश रहा।
गावित और बासिल दोनों को पुरुषों के 100 मीटर T47 इवेंट के लिए भारतीय टीम में शामिल किया गया था। आधिकारिक टीम सूची में दोनों का नाम दर्ज था।
क्या है T47 कैटेगरी?
T47 पैरा एथलेटिक्स की ट्रैक कैटेगरी है। इसमें ऐसे एथलीट हिस्सा लेते हैं जिनके एक या दोनों हाथों में शारीरिक अक्षमता होती है। इस कैटेगरी में हाथ के किसी हिस्से की कमी या हाथ की कार्यक्षमता प्रभावित होने जैसी स्थितियों वाले खिलाड़ी प्रतिस्पर्धा करते हैं।
गावित ने इसी कैटेगरी में 100 मीटर की रेस जीतकर भारत को गोल्ड दिलाया।
गावित की कहानी भी संघर्ष से भरी
दिलीप महादु गावित की उपलब्धि के पीछे लंबा संघर्ष रहा है। महाराष्ट्र के नासिक के पास तोरण डोंगरी गांव से आने वाले गावित किसान परिवार से हैं। बचपन में वे अपने माता-पिता के साथ खेतों में काम करते थे।
बचपन में पेड़ से गिरने के बाद उनके दाहिने हाथ में गंभीर चोट लगी थी। चोट के बाद संक्रमण बढ़ने के कारण उनका हाथ कोहनी के नीचे से काटना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने खेल को अपना करियर बनाया और पैरा एथलेटिक्स में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई।
ग्लासगो में 10.71 सेकंड की दौड़ ने उनके संघर्ष को बड़ी उपलब्धि में बदल दिया।
बासिल ने भी रचा इतिहास
मोहम्मद बासिल ने भी इसी रेस में सिल्वर जीतकर भारत की उपलब्धि को और खास बना दिया। बासिल ने 10.83 सेकंड का समय निकाला।
बासिल सामान्य एथलीट के रूप में भी करीब आठ साल तक खेल चुके हैं। बाद में उन्होंने पैरा एथलेटिक्स की ओर रुख किया। 2025 में पैरा स्पोर्ट्स से जुड़ने के बाद उनके करियर को नई दिशा मिली।
मई 2026 में बेंगलुरु में आयोजित इंडियन ओपन इंटरनेशनल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने T47 100 मीटर में 10.63 सेकंड का समय निकालकर गोल्ड जीता था। इसके बाद उनका चयन ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए हुआ।
मुरली श्रीशंकर का लगातार दूसरा सिल्वर
एथलेटिक्स में भारत के लिए दूसरा बड़ा आकर्षण मुरली श्रीशंकर रहे। पुरुषों की लॉन्ग जंप फाइनल में उन्होंने 8.09 मीटर की छलांग लगाई और सिल्वर मेडल जीता।
गोल्ड जमैका के तजाय गेल ने 8.15 मीटर की छलांग के साथ जीता। श्रीशंकर का 8.09 मीटर का प्रदर्शन गोल्ड से सिर्फ 6 सेंटीमीटर कम रहा।
मेजबान स्कॉटलैंड के स्टीफन मैकेंजी ने 8.08 मीटर के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता।
श्रीशंकर के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में भी लॉन्ग जंप का सिल्वर मेडल जीता था। इस तरह वे लगातार दो कॉमनवेल्थ गेम्स में इस स्पर्धा में सिल्वर जीतने वाले पहले भारतीय बने।
चोट के बाद शानदार वापसी
मुरली श्रीशंकर की यह जीत उनकी वापसी की कहानी भी है। 2024 में लगी गंभीर चोट के कारण वे पेरिस ओलिंपिक में हिस्सा नहीं ले सके थे। चोट के बाद उन्होंने रिहैब और ट्रेनिंग के जरिए वापसी की।
ग्लासगो में 8.09 मीटर की छलांग के साथ उन्होंने साबित किया कि वे अभी भी दुनिया के शीर्ष लॉन्ग जंपरों में शामिल हैं।
भारत की मेडल टैली में सुधार
सातवें दिन के मुकाबलों के बाद भारत के खाते में 3 गोल्ड, 9 सिल्वर और 3 ब्रॉन्ज समेत कुल 15 मेडल हो गए। इसके साथ भारत मेडल टैली में आठवें स्थान पर पहुंच गया। ऑस्ट्रेलिया शीर्ष पर बना हुआ था।
भारत के तीन गोल्ड में दिलीप गावित के अलावा महिलाओं के पैरा शॉटपुट F57 में शर्मिला धनकड़ और महिलाओं के 48 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग में मीराबाई चानू के गोल्ड शामिल हैं।
बॉक्सिंग में भी भारत का दबदबा
कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की बॉक्सिंग टीम ने भी मजबूत प्रदर्शन जारी रखा। कई भारतीय मुक्केबाज सेमीफाइनल में पहुंच चुके हैं। बॉक्सिंग में सेमीफाइनल में पहुंचने के साथ खिलाड़ी का कम से कम ब्रॉन्ज मेडल पक्का हो जाता है, क्योंकि तीसरे स्थान के लिए अलग मुकाबला नहीं होता।
जैस्मिन लैम्बोरिया ने महिलाओं के 57 किलोग्राम वर्ग में इंग्लैंड की इलिस ग्लिन को 4-1 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई। उनके अलावा अरुंधति, साक्षी चौधरी, नरेंद्र बेरवाल, अंकुश पंघल और सचिन सहित कई भारतीय मुक्केबाज भी अंतिम चार में पहुंचे।
इससे भारतीय बॉक्सिंग टीम के लिए पदकों की उम्मीद और मजबूत हुई है।
शॉटपुट में तजिंदरपाल और समरदीप फाइनल में
पुरुषों के शॉटपुट में तजिंदरपाल सिंह तूर और समरदीप सिंह गिल ने फाइनल के लिए क्वालिफाई किया।
तूर ने दूसरे प्रयास में 20.14 मीटर का थ्रो किया और क्वालिफिकेशन मार्क पार कर लिया। समरदीप ने अपने पहले प्रयास में 19.95 मीटर का प्रदर्शन किया। दोनों खिलाड़ियों ने टॉप-12 में जगह बनाकर फाइनल का टिकट हासिल किया।
अब भारत की नजरें शॉटपुट फाइनल में भी पदक पर रहेंगी।
वेटलिफ्टिंग में संजना पदक से चूकीं
महिलाओं के 77 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग फाइनल में भारत की संजना को निराशा हाथ लगी। 19 वर्षीय संजना स्नैच में अपने तीनों प्रयासों में 94 किलोग्राम वजन उठाने में सफल नहीं हो सकीं।
इसके चलते स्नैच में उनके खाते में कोई वैध लिफ्ट दर्ज नहीं हुई और वे पदक की दौड़ से बाहर हो गईं।
भारत की नजरें अब और पदकों पर
ग्लासगो में भारतीय दल का प्रदर्शन लगातार बेहतर हो रहा है। पैरा एथलेटिक्स में गावित-बासिल की ऐतिहासिक 1-2 फिनिश और श्रीशंकर का लगातार दूसरा सिल्वर भारत के लिए सातवें दिन की सबसे बड़ी उपलब्धियां रहीं।
एक तरफ गावित ने गेम्स रिकॉर्ड के साथ गोल्ड जीता, वहीं बासिल ने अपने पहले बड़े कॉमनवेल्थ अभियान को सिल्वर के साथ यादगार बनाया। दूसरी तरफ श्रीशंकर ने चोट से वापसी के बाद लगातार दूसरी बार कॉमनवेल्थ लॉन्ग जंप में सिल्वर जीतकर अपनी निरंतरता साबित की।
भारत के खाते में अब 3 गोल्ड, 9 सिल्वर और 3 ब्रॉन्ज—कुल 15 मेडल हैं। आने वाले मुकाबलों में बॉक्सिंग, शॉटपुट और अन्य एथलेटिक्स इवेंट्स से भारत को और पदकों की उम्मीद है।
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