भारत का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन ग्वालियर में होगा स्थापित: नई दिल्ली के विज्ञान भवन में DoT और मध्य प्रदेश सरकार के बीच MoU हस्ताक्षरित

भारत का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन ग्वालियर में होगा स्थापित: नई दिल्ली के विज्ञान भवन में DoT और मध्य प्रदेश सरकार के बीच MoU हस्ताक्षरित

देश को दूरसंचार विनिर्माण (Telecom Manufacturing) में आत्मनिर्भर बनाने और 'मेक इन इंडिया' विजन को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। भारत सरकार के संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग (DoT) और मध्य प्रदेश सरकार के बीच देश के पहले टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन (TMZ), फेज-I की स्थापना के लिए आधिकारिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।

यह प्रतिष्ठित आयोजन 30 जुलाई 2026 (गुरुवार) को दोपहर 3:30 बजे नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन के हॉल नंबर 06 (द्वितीय तल) में संपन्न हुआ। इस ऐतिहासिक अवसर पर केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. Mohan Yadav (मोहन यादव) तथा संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी की गरिमामयी उपस्थिति रही। समारोह में केंद्र और राज्य सरकार के कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और दूरसंचार उद्योग क्षेत्र के प्रमुख प्रतिनिधि भी शामिल हुए।

परियोजना की रूपरेखा: 350 एकड़ का विशाल प्लग-एंड-प्ले क्लस्टर
ग्वालियर में आकार लेने जा रहा यह टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन (TMZ) पार पारंपरिक विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SEZ) से काफी अलग और आधुनिक है। यह पूरी तरह से दूरसंचार उपकरणों, डेटा सेंटरों और चिप निर्माण के समर्पित इकोसिस्टम के रूप में काम करेगा।

प्लग-एंड-प्ले मॉडल (Plug-and-Play Model): संपूर्ण जोन को लगभग 350 एकड़ क्षेत्र में प्लग-एंड-प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ तैयार किया जा रहा है। इसका सीधा फायदा यह होगा कि निवेशकों और विनिर्माण कंपनियों को शेड, बिजली, जल आपूर्ति और कनेक्टिविटी जैसी बुनियादी सुविधाएं पहले से तैयार मिलेंगी, जिससे उत्पादन तुरंत शुरू किया जा सकेगा।

विशेष प्रयोजन कंपनी (SPV) का गठन: MoU पर हस्ताक्षर के साथ ही परियोजना के त्वरित और सुगम क्रियान्वयन के लिए एक स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) का गठन किया जा रहा है, जो केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट की देखरेख करेगा।

वित्तीय विवरण और भूमि आवंटन
इस परियोजना को केंद्र और राज्य सरकार के अनूठे मॉडल पर विकसित किया जा रहा है, जिसमें वित्तीय और भौतिक संसाधनों का साझा योगदान है:

₹493 करोड़ का 100% केंद्रीय अनुदान: भारत सरकार के दूरसंचार विभाग द्वारा फेज-1 की कोर इंफ्रास्ट्रक्चर विकास लागत के लिए ₹493 करोड़ का शत-प्रतिशत केंद्रीय वित्तीय अनुदान स्वीकृत किया गया है।

निःशुल्क 170 एकड़ भूमि: मध्य प्रदेश सरकार द्वारा परियोजना के लिए ग्वालियर के साडा (SADA) क्षेत्र में 100 एकड़ तथा ग्वालियर आईटी पार्क (IT Park) में 70 एकड़—कुल मिलाकर 170 एकड़ भूमि पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है। इस आवंटित भूमि का अनुमानित बाजार मूल्य लगभग ₹596 करोड़ है।

₹15,000 करोड़ के निवेश और हजारों नौकरियों की संभावना
ग्वालियर का यह विनिर्माण केंद्र मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था में नए प्राण फूंकने के साथ-साथ रोजगार के अपार अवसर खोलेगा:

₹12,000 से ₹15,000 करोड़ का निवेश: इस जोन से आगामी वर्षों में ₹12,000 करोड़ से ₹15,000 करोड़ रुपये का निजी, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निवेश आकर्षित होने का अनुमान है।

5,000 प्रत्यक्ष कुशल रोजगार: इस परियोजना के पूर्ण संचालन से क्षेत्र में करीब 5,000 प्रत्यक्ष कुशल रोजगार (Skilled Jobs) सृजित होंगे। अकेले इसके प्रथम चरण (Phase-I) में ही लगभग 3,500 रोजगार उपलब्ध होने की उम्मीद है। इसके अलावा अप्रत्यक्ष रूप से लॉजिस्टिक्स, सर्विसिंग और वेंडर नेटवर्क में हजारों अन्य अवसर पैदा होंगे।

उत्पाद पोर्टफोलियो और 5G/6G रिसर्च हब
ग्वालियर TMZ केवल हार्डवेयर असेंबलिंग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह अनुसंधान, नवाचार और उच्च तकनीक निर्माण की संपूर्ण वैल्यू चेन को एक ही छत के नीचे लाएगा:

उत्पाद विनिर्माण: यहाँ राउटर, ऑप्टिकल फाइबर केबल (OFC), नेटवर्क इक्विपमेंट, 4G/5G/6G एंटीना, सेमीकंडक्टर चिप्स और डेटा सेंटर कंपोनेंट्स का स्वदेशी निर्माण किया जाएगा।

5G और 6G तकनीक अनुसंधान: केंद्र में 5G और आगामी 6G तकनीकों के रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) के लिए विशेष उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए जाएंगे।

साझा बुनियादी ढांचा: परिसर के भीतर ही सामान्य परीक्षण एवं प्रमाणन प्रयोगशालाएं (Common Testing & Certification Labs), अत्याधुनिक कोल्ड/ड्राय भंडारण सुविधाएं (Warehousing), सर्वसुविधायुक्त कनेक्टिविटी सड़कें और उन्नत आईसीटी (ICT) इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा।

MSMEs और स्टार्टअप्स को बूस्ट: इस जोन का सबसे बड़ा लाभ स्थानीय टेक स्टार्टअप्स और MSME इकाइयों को मिलेगा, जिन्हें बड़े वैश्वीकृत दिग्गजों के साथ साझेदारी और सप्लाई चेन में सीधे जुड़ने का अवसर प्राप्त होगा।

'आत्मनिर्भर भारत' और वैश्विक मानक स्थापित करने की ओर कदम
केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस अवसर पर कहा कि यह विनिर्माण जोन भारत के दूरसंचार परिदृश्य को आयात-निर्भरता से निकालकर निर्यात-संचालित बनाएगा। यह पहल भारत को अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) और 3rd जनरेशन पार्टनरशिप प्रोजेक्ट (3GPP) जैसे वैश्विक मानक-निर्धारण मंचों पर अग्रणी भूमिका दिलाने में मदद करेगी।

ग्वालियर में देश का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन स्थापित होने से न केवल चंबल-ग्वालियर अंचल की औद्योगिक पहचान बदलेगी, बल्कि मध्य प्रदेश 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन' (ISM) और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में देश का नया टेक-कैपिटल बनने की ओर अग्रसर होगा।