12 साल के सुमेध श्रीवास्तव का वर्ल्ड अर्निस चैंपियनशिप में चयन: इंदौर का नन्हा खिलाड़ी दिल्ली में करेगा भारत का प्रतिनिधित्व, 17 देशों के खिलाड़ी होंगे आमने-सामने
उम्र महज 12 साल, लेकिन उपलब्धियों की फेहरिस्त किसी अनुभवी खिलाड़ी से कम नहीं। इंदौर के सुमेध श्रीवास्तव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। सुमेध का चयन 18वीं WEKAF वर्ल्ड अर्निस चैंपियनशिप-2026 के लिए हुआ है। वह नई दिल्ली में होने वाली इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत की ओर से मुकाबला करेंगे।
चैंपियनशिप 1 से 4 अगस्त 2026 तक नई दिल्ली के तालकटोरा इंडोर स्टेडियम में आयोजित होगी। WEKAF से जुड़ी आधिकारिक जानकारी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों की तैयारियों से संबंधित स्रोत भी इन तारीखों और दिल्ली को आयोजन स्थल के रूप में पुष्ट करते हैं।
सुमेध के लिए यह सिर्फ एक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत का अगला पड़ाव है। उन्होंने बेहद कम उम्र में कराटे के साथ अर्निस की ट्रेनिंग शुरू की और राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन के बाद अब उन्हें दुनिया के खिलाड़ियों के सामने अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिला है।
साढ़े तीन साल की उम्र में शुरू किया कराटे
सुमेध के पिता डॉ. सुभोध श्रीवास्तव के मुताबिक, सुमेध ने करीब साढ़े तीन साल की उम्र में कराटे का प्रशिक्षण शुरू किया था। लगातार अभ्यास के बाद उन्होंने कराटे में ब्लैक बेल्ट हासिल की।
परिवार के अनुसार, सुमेध अब तक राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में 35 से अधिक स्वर्ण पदक जीत चुके हैं। कराटे के साथ-साथ उन्होंने अर्निस की ट्रेनिंग भी शुरू की। अर्निस की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतने के बाद उनका चयन विश्व चैंपियनशिप के लिए हुआ।
यानी जिस उम्र में अधिकांश बच्चे खेल को सिर्फ मनोरंजन के तौर पर देखते हैं, उस उम्र में सुमेध ने अनुशासन और प्रतियोगी खेल को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लिया है।
पहली बार भारत में हो रही चैंपियनशिप
इस बार की प्रतियोगिता भारत के लिए भी खास है। 18वीं WEKAF वर्ल्ड अर्निस चैंपियनशिप का आयोजन नई दिल्ली में किया जा रहा है। WEKAF यानी World Eskrima Kali Arnis Federation अर्निस के अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगी ढांचे से जुड़ी संस्था है। WEKAF का गठन 1989 में हुआ था और इसके माध्यम से अर्निस प्रतियोगिताओं का अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क विकसित हुआ है।
चैंपियनशिप के लिए भारत में तैयारियां भी की गई हैं। अप्रैल 2026 में श्रीनगर में खिलाड़ियों और रेफरी के लिए प्रशिक्षण सेमिनार आयोजित किया गया था, जिसमें 15 राज्यों के 200 से अधिक खिलाड़ी और अधिकारी शामिल हुए थे। इसका उद्देश्य विश्व चैंपियनशिप से पहले खिलाड़ियों की तकनीकी तैयारी और रेफरी के मानकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक मजबूत करना था।
17 देशों के खिलाड़ियों के बीच मुकाबला
सुमेध को इस चैंपियनशिप में अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों से मुकाबला करने का मौका मिलेगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रतियोगिता में भारत के साथ चीन, अमेरिका, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, दक्षिण कोरिया, यूनाइटेड किंगडम, फिलीपींस, सिंगापुर, वियतनाम, श्रीलंका, ईरान, नीदरलैंड्स और पुर्तगाल समेत कई देशों के खिलाड़ी हिस्सा लेंगे।
इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर सुमेध के सामने सिर्फ पदक जीतने की चुनौती नहीं होगी, बल्कि अलग-अलग देशों की तकनीक, रणनीति और प्रतिस्पर्धी शैली को समझने का भी मौका होगा।
पैडेड स्टिक कैटेगरी में उतरेंगे सुमेध
सुमेध अर्निस की पैडेड स्टिक कैटेगरी में अपने आयु वर्ग का प्रतिनिधित्व करेंगे। इस तरह की प्रतियोगिताओं में सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए खिलाड़ियों को निर्धारित सुरक्षा उपकरण पहनाए जाते हैं।
अंतरराष्ट्रीय अर्निस प्रतियोगिताओं में पैडेड स्टिक, पॉइंट स्पैरिंग और अन्य स्पर्धाएं शामिल होती हैं। WEKAF से जुड़े प्रतियोगिता विवरणों में पैडेड स्टिक, डबल स्टिक, सिंगल स्टिक और फॉर्म्स जैसी अलग-अलग श्रेणियों का उल्लेख मिलता है।
सुमेध के मुकाबले में भी स्पीड, टाइमिंग, तकनीक, फुटवर्क और प्रतिक्रिया की क्षमता अहम भूमिका निभाएगी।
कोच बोले- स्पीड, स्टैमिना और तकनीक सुमेध की ताकत
सुमेध के कोच ग्रैंडमास्टर सैयद आलम के मुताबिक उनकी सबसे बड़ी ताकत स्पीड, स्टैमिना और तकनीक है।
कोच के अनुसार अर्निस में सिर्फ ताकत से काम नहीं चलता। खिलाड़ी को सामने वाले की गतिविधि को तेजी से पढ़ना, सही समय पर प्रतिक्रिया देना और तकनीक का इस्तेमाल करना पड़ता है। सुमेध इन सभी पहलुओं पर लगातार काम कर रहे हैं।
उनकी सबसे बड़ी खासियत सीखने की ललक और नियमित अभ्यास को माना जा रहा है। कम उम्र के बावजूद वे प्रशिक्षण को गंभीरता से लेते हैं और हर मुकाबले से सीखने की कोशिश करते हैं।
35 से ज्यादा गोल्ड जीतने का दावा
परिवार के अनुसार सुमेध ने अब तक कराटे में राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में 35 से अधिक स्वर्ण पदक जीते हैं। यही प्रतिस्पर्धी अनुभव अब अर्निस के अंतरराष्ट्रीय मंच पर उनके लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
हालांकि कराटे और अर्निस दोनों मार्शल आर्ट हैं, लेकिन दोनों की प्रतियोगी तकनीकों और नियमों में अंतर है। अर्निस मुख्य रूप से फिलीपींस की पारंपरिक मार्शल आर्ट है और इसमें स्टिक-आधारित तकनीकों के साथ बिना हथियार आत्मरक्षा और फॉर्म्स का प्रशिक्षण भी दिया जाता है।
पढ़ाई में भी आगे, मोबाइल से दूरी
सुमेध की मां नंदिता श्रीवास्तव के मुताबिक खेल के साथ पढ़ाई पर भी उनका पूरा ध्यान रहता है। परिवार का कहना है कि सुमेध ने कई ओलंपियाड प्रतियोगिताओं में भी अच्छा प्रदर्शन किया है।
उनकी दिनचर्या में पढ़ाई और खेल दोनों के लिए समय निर्धारित है। परिवार के मुताबिक सुमेध मोबाइल फोन से दूरी रखते हैं और अपना अधिक समय पढ़ाई तथा अभ्यास में लगाते हैं।
यही संतुलन उनके परिवार के लिए भी गर्व की वजह है—एक तरफ पढ़ाई में प्रदर्शन और दूसरी तरफ खेल के मैदान में लगातार नई उपलब्धियां।
क्या है अर्निस?
अर्निस फिलीपींस की पारंपरिक मार्शल आर्ट है, जिसे Eskrima और Kali नामों से भी जाना जाता है। आधुनिक प्रतियोगी रूप में इसमें स्टिक-आधारित मुकाबले, फॉर्म्स और अलग-अलग स्पैरिंग प्रारूप देखने को मिलते हैं। WEKAF इसी खेल के अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगी स्वरूप को बढ़ावा देने वाली संस्थाओं में प्रमुख है।
अर्निस में खिलाड़ी की फुर्ती, हाथ-आंखों का तालमेल, संतुलन, टाइमिंग, प्रतिक्रिया और एकाग्रता महत्वपूर्ण होती है। प्रतियोगिता के प्रारूप के अनुसार सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है।
WEKAF से जुड़े प्रतियोगिता प्रारूपों में पैडेड स्टिक पॉइंट स्पैरिंग, सिंगल स्टिक, डबल स्टिक, बांकॉ और फॉर्म्स जैसी स्पर्धाएं शामिल हैं।
भारत में तेजी से बढ़ रहा अर्निस
भारत में भी अर्निस की प्रतियोगिताएं अब राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित हो रही हैं। जनवरी 2026 में नई दिल्ली में आयोजित Arnis National Championship 2025-26 में 18 राज्यों के खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था। इससे देश में इस मार्शल आर्ट के बढ़ते प्रतिस्पर्धी आधार का अंदाजा लगाया जा सकता है।
अप्रैल में श्रीनगर में हुए प्रशिक्षण सेमिनार में भी 15 राज्यों के 200 से ज्यादा खिलाड़ी और अधिकारी शामिल हुए थे। यह गतिविधियां बताती हैं कि भारत में अर्निस को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने पर जोर बढ़ा है।
अब नजर दिल्ली के मुकाबले पर
इंदौर के 12 वर्षीय सुमेध श्रीवास्तव के सामने अब सबसे बड़ा मंच है। 1 से 4 अगस्त तक नई दिल्ली के तालकटोरा इंडोर स्टेडियम में होने वाली विश्व चैंपियनशिप में वह भारत की जर्सी में उतरेंगे।
35 से ज्यादा स्वर्ण पदकों का अनुभव, कम उम्र में हासिल किया ब्लैक बेल्ट और अर्निस में राष्ट्रीय स्तर का प्रदर्शन—इन सबके बाद अब सुमेध की नजर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने प्रदर्शन को यादगार बनाने पर होगी।
इंदौर का यह 12 साल का खिलाड़ी अब सिर्फ अपने शहर का नहीं, बल्कि विश्व मंच पर भारत का प्रतिनिधि बनकर उतरने जा रहा है।
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