धार भोजशाला विवाद: जुमे की नमाज के लिए तय वैकल्पिक जगह पर विवाद, स्थानीय लोगों का विरोध; प्रशासन ने संभाला मोर्चा
मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर को लेकर एक बार फिर हलचल बढ़ गई है। शुक्रवार की नमाज के लिए जिला प्रशासन और मुस्लिम समाज के बीच वैकल्पिक स्थान को लेकर सहमति बनने के बाद अब स्थानीय लोगों ने इस फैसले पर आपत्ति जताई है। विरोध कर रहे स्थानीय निवासियों का कहना है कि जिस जमीन को नमाज के लिए चुना गया है, वह उनकी निजी भूमि है और वे वहां नमाज की अनुमति नहीं देंगे।
स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने मौके पर पुलिस बल तैनात किया है। अधिकारी लगातार स्थानीय लोगों और संबंधित पक्षों से बातचीत कर स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहे हैं।
भोजशाला की बाउंड्रीवॉल से लगी जमीन पर तय हुआ था नमाज स्थल
धार जिला प्रशासन ने जुमे की नमाज के लिए भोजशाला परिसर की बाउंड्रीवॉल से सटी खसरा नंबर 611 और 612 की जमीन को वैकल्पिक स्थान के रूप में चिह्नित किया था।
प्रशासन और मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों के बीच हुई बातचीत के बाद इस स्थान पर नमाज की व्यवस्था को लेकर सहमति बनी थी। मुस्लिम पक्ष का कहना था कि यह जगह भोजशाला परिसर के नजदीक है और यहां से कमाल मौलाना मस्जिद दिखाई देती है, इसलिए इसे उपयुक्त माना गया।
हालांकि, इस निर्णय के बाद स्थानीय रहवासियों ने जमीन के स्वामित्व को लेकर सवाल उठाए हैं।
स्थानीय लोगों का दावा- "यह हमारी पुश्तैनी जमीन है"
विरोध कर रहे स्थानीय निवासियों का कहना है कि खसरा नंबर 611 और 612 की जमीन पर उनका वर्षों पुराना अधिकार है और वे लंबे समय से यहां खेती करते आ रहे हैं।
स्थानीय निवासी चंद्रकांत देवड़ा ने कहा कि यह जमीन उनके परिवार की है और इससे उनका जीवन-यापन जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि बिना जमीन के स्वामित्व को स्पष्ट किए यहां किसी अन्य गतिविधि की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
वहीं, राधाबाई सहित अन्य स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन के फैसले पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि जमीन को समतल करने या नमाज के लिए कोई अन्य व्यवस्था करने की कोशिश की गई तो वे इसका विरोध करेंगे।
स्थानीय लोगों ने यह भी संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर वे कानूनी रास्ता अपना सकते हैं।
मौके पर पहुंचा प्रशासन, पुलिस बल तैनात
विवाद की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस को भी बुलाया गया ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति को रोका जा सके।
एसडीएम राजकुमार हलदर ने कहा कि मामले में वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा की जा रही है और आगे का निर्णय नियमों और न्यायालय के निर्देशों के अनुसार लिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य कानून व्यवस्था बनाए रखना है और सभी पक्षों की बात सुनकर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
मुस्लिम पक्ष ने बताया- क्यों चुनी गई यह जगह?
कमाल मौलाना वेलफेयर सोसायटी के प्रतिनिधि अब्दुल समद ने बताया कि खसरा नंबर 611 और 612 की जमीन इसलिए चुनी गई क्योंकि यहां से कमाल मौलाना मस्जिद दिखाई देती है और यह भोजशाला के आसपास का क्षेत्र है।
उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि नमाज स्थल तक पहुंचने के लिए रास्ते की व्यवस्था की जाए। साथ ही बारिश के कारण जमीन पर फैली कीचड़ और पानी को देखते हुए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है।
मुस्लिम पक्ष ने वजू के लिए पानी, सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन की मांग भी प्रशासन के सामने रखी है।
बारिश बनी नई चुनौती, जमीन पर कीचड़ और पानी भरा
शुक्रवार सुबह इलाके में बारिश होने के कारण प्रशासन के सामने एक और चुनौती खड़ी हो गई। जिस जमीन को नमाज स्थल के लिए चुना गया है, वहां वर्तमान में खेती हो रही है और बारिश के कारण कई जगह पानी भर गया है।
मौके पर मौजूद अधिकारियों ने जमीन की स्थिति का जायजा लिया और व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा की।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद शुरू हुई थी वैकल्पिक व्यवस्था की प्रक्रिया
भोजशाला मामले में नमाज के लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद शुरू हुई थी।
14 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया था कि शुक्रवार दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच नमाज के लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराया जाए।
इसके बाद धार जिला प्रशासन ने पहले मालीवाड़ा गांव में चालीसपीर दरगाह के पास नमाज की जगह निर्धारित की थी, लेकिन मुस्लिम पक्ष ने इस स्थान को स्वीकार नहीं किया था।
मुस्लिम समाज का कहना था कि यह जगह भोजशाला से करीब दो किलोमीटर दूर है और न्यायालय के निर्देश की भावना के अनुरूप नहीं है। इसके बाद भोजशाला परिसर के आसपास वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
भोजशाला का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व
धार की भोजशाला मध्य प्रदेश के सबसे चर्चित ऐतिहासिक स्थलों में से एक है। इसे लेकर लंबे समय से हिंदू और मुस्लिम समुदायों के अलग-अलग धार्मिक दावे रहे हैं।
हिंदू पक्ष इसे मां वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौलाना मस्जिद से जुड़ा स्थल बताता है। इसी कारण भोजशाला परिसर में पूजा और नमाज को लेकर समय-समय पर विवाद सामने आते रहे हैं।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षण में आने वाले इस परिसर को लेकर न्यायालय में भी कई मामले चल रहे हैं।
अब प्रशासन के सामने चुनौती- शांतिपूर्ण व्यवस्था बनाए रखना
फिलहाल धार प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती शुक्रवार की नमाज को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराना और सभी पक्षों की आपत्तियों का समाधान करना है।
जहां मुस्लिम समाज प्रशासन द्वारा तय स्थान पर नमाज की व्यवस्था चाहता है, वहीं स्थानीय निवासी जमीन के स्वामित्व को लेकर विरोध कर रहे हैं।
आने वाले समय में प्रशासन की बातचीत और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही इस मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
news desk MPcg