राम मंदिर चंदा विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा FIR और CBI जांच की मांग, करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था पर उठे सवाल

राम मंदिर चंदा विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा FIR और CBI जांच की मांग, करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था पर उठे सवाल

अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और दान राशि के कथित गलत इस्तेमाल का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इस संबंध में दायर एक याचिका में आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने, एफआईआर दर्ज करने और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में CBI जांच कराने की मांग की गई है।

याचिका में कहा गया है कि यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता का नहीं, बल्कि देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास से जुड़ा हुआ है। इसलिए इसकी जांच पूरी तरह स्वतंत्र और पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए।

क्या है याचिका में मांग

एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड अनूप प्रकाश अवस्थी द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि दान राशि के कथित दुरुपयोग से जुड़े आरोपों पर औपचारिक एफआईआर दर्ज कराई जाए और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में किसी स्वतंत्र एजेंसी, जैसे CBI, से जांच कराई जाए।

याचिकाकर्ता ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति या ट्रस्ट को दोषी ठहराना नहीं है, बल्कि आरोपों की गंभीरता को देखते हुए निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना है ताकि जनता का विश्वास बना रहे।

SIT पर भी उठाए सवाल

याचिका में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) को पर्याप्त नहीं बताया गया है। इसमें कहा गया है कि संवैधानिक अदालत की निगरानी के बिना जांच की निष्पक्षता पर श्रद्धालुओं के मन में संदेह बना रह सकता है।

याचिका के अनुसार, करोड़ों रुपये के दान से जुड़े आरोपों के बावजूद अब तक एफआईआर दर्ज नहीं होना भी कई सवाल खड़े करता है।

आस्था और पारदर्शिता दोनों जरूरी

याचिका में कहा गया है कि श्री राम जन्मभूमि मंदिर को मिलने वाला चढ़ावा केवल आर्थिक योगदान नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है। ऐसे में दान राशि के प्रबंधन, लेखा-जोखा, सुरक्षा और उपयोग को लेकर किसी भी प्रकार की आशंका दूर करने के लिए स्वतंत्र जांच आवश्यक है।

राजनीतिक बयानबाजी के बीच बढ़ा विवाद

राम मंदिर चढ़ावे में कथित अनियमितताओं का मुद्दा राजनीतिक बहस का विषय भी बन चुका है। विपक्ष की ओर से न्यायिक जांच की मांग उठाई गई है, जबकि उत्तर प्रदेश सरकार पहले ही मामले की जांच के लिए SIT गठित कर चुकी है, जिसे निर्धारित समय सीमा में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।