उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) में बड़ी टूट का दावा, 6 सांसदों ने शिंदे गुट को समर्थन देने की तैयारी; लोकसभा अध्यक्ष को सौंपी चिट्ठी
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी हलचल का दावा सामने आया है। उद्धव ठाकरे गुट (शिवसेना UBT) को लोकसभा में बड़ा झटका लग सकता है, क्योंकि पार्टी के 6 सांसदों के अलग गुट बनाने और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट के साथ जाने की अटकलें तेज हो गई हैं।
सूत्रों के अनुसार, इन सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक पत्र सौंपा है, जिसमें उन्होंने अपने को एक अलग समूह के रूप में मान्यता देने की मांग की है। इस कदम को संसद में शिवसेना के अंदरूनी विभाजन के रूप में देखा जा रहा है।
अलग गुट बनाने की प्रक्रिया तेज, राजनीतिक हलचल बढ़ी
जानकारी के अनुसार, इन 6 सांसदों ने लोकसभा में एक अलग संसदीय समूह बनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी है। राजनीतिक हलकों में इसे बेहद अहम घटनाक्रम माना जा रहा है, क्योंकि इससे संसद में पार्टी की ताकत और संख्या दोनों पर असर पड़ सकता है।
बताया जा रहा है कि ये सभी सांसद भविष्य में शिंदे गुट में शामिल होने की तैयारी में हैं। इससे महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया समीकरण बनने की संभावना जताई जा रही है।
2022 जैसी राजनीतिक स्थिति की फिर से चर्चा
यह घटनाक्रम 2022 की उस बड़ी राजनीतिक टूट की याद दिलाता है, जब शिवसेना के कई विधायक एकनाथ शिंदे के साथ जाकर पार्टी से अलग हो गए थे। उसी तरह अब लोकसभा में भी समान स्थिति बनने की आशंका राजनीतिक विश्लेषकों द्वारा जताई जा रही है।
यदि यह विभाजन आगे बढ़ता है, तो उद्धव ठाकरे गुट के लिए यह एक और बड़ा राजनीतिक झटका माना जाएगा।
उद्धव गुट की ओर से रोकने की कोशिशें
सूत्रों के मुताबिक, शिवसेना (UBT) नेतृत्व इस संभावित टूट को रोकने के लिए सक्रिय हो गया है। पार्टी की ओर से लोकसभा अध्यक्ष से आग्रह किया गया है कि किसी भी अलग गुट को मान्यता देने से पहले सभी संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं की पूरी जांच की जाए।
पार्टी का कहना है कि यह मामला केवल राजनीतिक नहीं बल्कि संगठनात्मक एकता से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसे गंभीरता से देखा जाना चाहिए।
राजनीतिक समीकरण बदलने की संभावना
यदि 6 सांसद वास्तव में अलग होकर शिंदे गुट में शामिल होते हैं, तो इसका सीधा असर लोकसभा में शिवसेना (UBT) की स्थिति पर पड़ेगा। इससे न केवल महाराष्ट्र की राजनीति प्रभावित होगी, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी गठबंधन के समीकरण भी बदल सकते हैं।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम आने वाले समय में महाराष्ट्र की सत्ता राजनीति में एक और बड़े बदलाव का संकेत हो सकता है।
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