झारखंड में NGO फंडिंग और मिशनरी गतिविधियों की जांच की मांग, IRS अधिकारी निशा उरांव ने उठाए सवाल
झारखंड में स्वयंसेवी संगठनों (NGOs), विदेशी फंडिंग और कथित मिशनरी गतिविधियों को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। भारतीय राजस्व सेवा (IRS) अधिकारी निशा उरांव ने इन संस्थाओं की फंडिंग, कार्यप्रणाली और उपयोग पर गहन जांच की मांग उठाई है। साथ ही उन्होंने आदिवासी आरक्षण में ‘क्रीमी लेयर’ लागू करने की चर्चा का समर्थन करते हुए सुप्रीम कोर्ट के हालिया रुख पर आभार व्यक्त किया है।
‘क्रीमी लेयर’ और दोहरे लाभ पर उठाए सवाल
निशा उरांव ने कहा कि आदिवासी समाज में भी ‘क्रीमी लेयर’ की अवधारणा पर विचार होना चाहिए, ताकि आरक्षण का लाभ सही और जरूरतमंद वर्ग तक पहुंच सके। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जिन आदिवासियों ने धर्म परिवर्तन किया है, उन्हें एक ओर आरक्षण का लाभ मिलता है, वहीं दूसरी ओर कई NGOs के माध्यम से मिलने वाली सुविधाओं और टैक्स छूट का भी फायदा मिलता है।
उनके अनुसार, यह स्थिति नीति स्तर पर समीक्षा की मांग करती है।
7,500 से अधिक NGOs पंजीकृत
आधिकारिक ‘दर्पण पोर्टल’ के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि झारखंड में लगभग 7,500 NGOs पंजीकृत हैं। इनमें से बड़ी संख्या में संगठन निम्न क्षेत्रों में कार्यरत बताए गए हैं:
शिक्षा एवं संस्कृति: 2,235
जनजातीय मामले: 1,556
अल्पसंख्यक मामले: 1,095
धार्मिक क्षेत्र: 556
अन्य श्रेणियों सहित कुल प्रमुख: 5,442
विदेशी फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका
IRS अधिकारी ने विदेशी फंडिंग के उपयोग पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि विदेशों से आने वाली भारी धनराशि का उपयोग वास्तव में किन उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी संगठन द्वारा प्राप्त धन का उपयोग सेवा कार्यों के बजाय अन्य गतिविधियों, जैसे कथित धर्मांतरण या गैर-सामाजिक कार्यों में किया जा रहा है, तो यह मनी लॉन्ड्रिंग के दायरे में आ सकता है और इसकी सख्त जांच जरूरी है।
जांच की मांग तेज
इस बयान के बाद झारखंड में NGOs और उनकी गतिविधियों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस और तेज हो गई है। कई लोग इसे पारदर्शिता की जरूरत बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे संवेदनशील मुद्दा मानकर सावधानीपूर्वक चर्चा की वकालत कर रहे हैं।
news desk MPcg