16 साल तक सिपाही को मिलता रहा वेतन, अब वसूली के आदेश पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक

16 साल तक सिपाही को मिलता रहा वेतन, अब वसूली के आदेश पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक

वेतन निर्धारण में गलती बताकर विभाग ने जारी किया था रिकवरी आदेश, कोर्ट ने कहा- कर्मचारी को सुनवाई का मौका देना जरूरी

जबलपुर। नरसिंहपुर पुलिस के सिपाही हीरालाल यादव को करीब 16 साल तक विभाग की ओर से निर्धारित वेतन और वेतनवृद्धि का भुगतान किया जाता रहा। इसके बाद विभाग ने वेतन निर्धारण में गलती बताते हुए सिपाही को किए गए अधिक भुगतान की राशि वापस लेने का आदेश जारी कर दिया। इस कार्रवाई के खिलाफ सिपाही ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने विभाग के रिकवरी आदेश पर रोक लगा दी है।

मामला नरसिंहपुर पुलिस विभाग से जुड़ा है। सिपाही हीरालाल यादव को लंबे समय तक विभागीय स्तर पर तय वेतन और वेतन वृद्धि का लाभ मिलता रहा। बाद में विभाग की ओर से वेतन निर्धारण में त्रुटि बताते हुए यह कहा गया कि सिपाही को निर्धारित राशि से अधिक भुगतान हुआ है। इसके बाद अतिरिक्त भुगतान की राशि की वसूली के लिए आदेश जारी किया गया।

विभाग की इस कार्रवाई को सिपाही ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। याचिका में बताया गया कि वेतन का निर्धारण विभाग द्वारा किया गया था और उसी आधार पर उसे भुगतान मिलता रहा। कर्मचारी की ओर से किसी प्रकार की गलती या गलत जानकारी के कारण यह भुगतान नहीं हुआ था। इसके बावजूद कई वर्षों बाद उससे राशि की वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने वसूली प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि किसी कर्मचारी के वेतन से राशि की वसूली करने का सीधा असर उसके वेतन और आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। ऐसी कार्रवाई कर्मचारी के लिए प्रतिकूल नागरिक परिणाम पैदा करती है, इसलिए वसूली का आदेश जारी करने से पहले संबंधित कर्मचारी को अपना पक्ष रखने और सुनवाई का अवसर दिया जाना जरूरी है।

हाईकोर्ट की एकलपीठ ने नरसिंहपुर पुलिस अधीक्षक की ओर से जारी किए गए वसूली आदेश को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि बिना सुनवाई का अवसर दिए इस तरह की कार्रवाई नहीं की जा सकती। साथ ही निर्देश दिए गए कि यदि सिपाही से कोई राशि पहले ही वसूल की जा चुकी है तो उसे वापस किया जाए।

यह आदेश हाईकोर्ट जबलपुर में न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने नरसिंहपुर निवासी हीरालाल यादव की याचिका पर सुनाया। मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मोहनलाल शर्मा, शिवम शर्मा और जितेंद्र गर्ग ने पैरवी की। वहीं राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता कमल सिंह बघेल ने पक्ष रखा।

हाईकोर्ट के इस फैसले से सिपाही को राहत मिली है। कोर्ट के आदेश के बाद फिलहाल विभाग की ओर से की जा रही वेतन रिकवरी की कार्रवाई पर रोक लग गई है।