एक ही घर से उठीं चार अर्थियां, गांव में मातम पिता की दर्दभरी बात सुन छलक पड़े आंसू
राजस्थान के बालोतरा जिले के कोडुका गांव से ऐसी हृदयविदारक खबर सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया। मंगलवार सुबह तक जिस घर में बच्चों की किलकारियां और परिवार की रौनक थी, कुछ ही घंटों में वहां मातम पसर गया। परिवार के चारों बेटों की मौत ने बुजुर्ग पिता भंवरलाल की दुनिया उजाड़ दी।
पिता की टूटती आवाज ने नम कर दीं आंखें
अपने चार जवान बेटों को खो चुके भंवरलाल का दर्द शब्दों में बयां नहीं हो सकता। कांपती आवाज में उन्होंने सिर्फ इतना कहा—"भगवान, कोई एक बेटा तो बच जाता... अब घर में कमाने वाला कोई नहीं रहा।" यह कहते-कहते उनकी आंखें भर आईं और आसपास मौजूद लोगों की भी आंखें नम हो गईं।
सुबह तक था खुशियों से भरा घर, कुछ घंटों में छा गया मातम
मंगलवार सुबह घर का माहौल बिल्कुल सामान्य था। आंगन में छोटे-छोटे बच्चे खेल रहे थे और चारों भाई जल्दबाजी में खाना खाकर अपने काम पर निकलने की तैयारी कर रहे थे। किसी ने भी नहीं सोचा था कि कुछ ही देर बाद ऐसी त्रासदी होगी, जो पूरे परिवार की जिंदगी बदल देगी।
गांव में पसरा सन्नाटा, सांत्वना देने वाले भी रो पड़े
घटना के बाद पूरे कोडुका गांव में शोक की लहर है। गांव के लोग भंवरलाल के घर पहुंचकर परिवार को ढांढस बंधाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हालात ऐसे हैं कि सांत्वना देने वाले भी खुद आंसू नहीं रोक पा रहे। हर किसी की जुबान पर बस एक ही बात है कि इतनी बड़ी त्रासदी किसी परिवार के साथ न हो।
बच्चों के सिर से उठा पिता का साया, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
चारों बेटों के असमय निधन से उनके छोटे-छोटे बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया है। परिवार के सामने अब आर्थिक और सामाजिक दोनों तरह का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। गांव के लोग भी परिवार की मदद के लिए आगे आने की बात कर रहे हैं।
यह घटना सिर्फ एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे समाज का दर्द बन गई है। एक पिता की आंखों में अपने बेटों को खोने का जो दर्द है, उसे शब्दों में बयां कर पाना बेहद मुश्किल है।
news desk MPcg