अल-कायदा हमले की दर्दनाक कहानी के बीच चमका इराक का सितारा, अयमेन हुसैन ने फीफा वर्ल्ड कप 2026 में किया ऐतिहासिक गोल
फीफा वर्ल्ड कप 2026 में इराक के स्ट्राइकर अयमेन हुसैन ने नॉर्वे के खिलाफ मुकाबले में शानदार गोल कर फुटबॉल जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। लेकिन इस सफलता के पीछे उनकी जिंदगी की कहानी बेहद दर्दनाक और संघर्षों से भरी रही है, जिसने उनके इस गोल को और भी खास बना दिया है।
बचपन में ही झेला आतंक का दर्द
अयमेन हुसैन का जन्म 1996 में उत्तरी-मध्य इराक के अल-हाविजा जिले के अल-सफरा क्षेत्र में एक साधारण परिवार में हुआ था। उनका बचपन युद्ध और अस्थिरता के माहौल में बीता।
जब वह मात्र 12 साल के थे, तब एक दर्दनाक घटना ने उनकी जिंदगी बदल दी। रिपोर्ट्स के अनुसार, उनके पिता, जो इराकी सेना में कार्यरत थे, की अल-कायदा आतंकियों द्वारा गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।
परिवार ने बताया कि उनके पिता घर के निर्माण के लिए सामान लेने गए थे, लेकिन कुछ घंटों बाद उनकी हत्या की खबर आई, जिसने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
पिता की हत्या के कुछ वर्षों बाद उनके परिवार को एक और बड़ा झटका लगा, जब उनके भाई का अपहरण हो गया और वह आज तक लापता हैं। इन लगातार दुखद घटनाओं ने अयमेन हुसैन के बचपन को पूरी तरह बदल दिया।
इन परिस्थितियों में भी उनकी मां ने उन्हें हिम्मत दी और फुटबॉल खेलने के लिए प्रोत्साहित किया, जिससे उनका खेल करियर आगे बढ़ सका।
फुटबॉल के जरिए बदली किस्मत
सभी मुश्किलों के बावजूद अयमेन हुसैन ने हार नहीं मानी और 2013 में दोहुक क्लब के साथ अपने पेशेवर करियर की शुरुआत की। धीरे-धीरे उन्होंने अपनी मेहनत और प्रदर्शन से इराकी टीम में जगह बनाई।
उनकी मेहनत का नतीजा यह रहा कि वह आज फीफा वर्ल्ड कप जैसे बड़े मंच पर अपने देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
नॉर्वे के खिलाफ ऐतिहासिक गोल
फीफा वर्ल्ड कप 2026 के ग्रुप मुकाबले में इराक का सामना नॉर्वे से हुआ, जिसमें टीम को 4-1 से हार का सामना करना पड़ा। हालांकि, इस मैच में इराक के लिए सबसे खास पल अयमेन हुसैन का गोल रहा।
उन्होंने एक शानदार हेडर के जरिए गेंद को नेट में पहुंचाकर इराक के लिए टूर्नामेंट का दूसरा विश्व कप गोल किया। इस गोल ने इराकी फैन्स के बीच जबरदस्त उत्साह पैदा कर दिया।
हालांकि मैच के अंत में उन्होंने एक आत्मघाती गोल भी कर दिया, लेकिन उनके कुल प्रदर्शन की खूब सराहना की गई।
कोच और टीम ने जताया भरोसा
इराक टीम के कोच ग्राहम अर्नोल्ड ने हुसैन के प्रदर्शन की तारीफ करते हुए कहा कि उनके खेलने का तरीका और मेहनत टीम के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि चोटों के बावजूद उनका 90 मिनट तक खेलना टीम के लिए प्रेरणादायक है।
टीम के डिफेंडर हुसैन अली ने भी कहा कि भले ही परिणाम निराशाजनक रहा हो, लेकिन अयमेन का गोल पूरे देश के लिए गर्व का पल है।
इराक का संघर्षपूर्ण सफर जारी
इराक का यह फीफा वर्ल्ड कप केवल दूसरा विश्व कप है और 40 वर्षों बाद टीम इस स्तर पर खेल रही है। ऐसे में अयमेन हुसैन जैसे खिलाड़ियों का प्रदर्शन देश के लिए उम्मीद की किरण माना जा रहा है।
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