भोपाल में ATS की बड़ी कार्रवाई, कोचिंग टीचर की आड़ में कथित संदिग्ध नेटवर्क और ऑनलाइन गतिविधियों का बड़ा खुलासा
2047 तक भारत में कट्टरपंथी मुस्लिम राज, शरिया कानून के लिए बड़ी साजिश
मध्य प्रदेश एंटी-टेरर स्क्वाड (ATS) ने भोपाल के काजी कैंप से मोहम्मद फराज नामक एक ऐसे खतरनाक कट्टरपंथी को गिरफ्तार किया है, जो कोचिंग टीचर की आड़ में देश के खिलाफ घृणित साजिश रच रहा था। फराज केवल एक शिक्षक नहीं, बल्कि व्हाट्सएप और टेलीग्राम के जरिए युवाओं के दिमाग में जहर घोलने वाला एक ऑपरेटिव था। पूछताछ में इस साजिशकर्ता ने कबूला कि वह विदेशी "मुजाहिदीन" और पाकिस्तानी तत्वों के सीधे संपर्क में था और उसका अंतिम लक्ष्य साल 2047 तक भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को उखाड़कर यहाँ एक कट्टरपंथी मुस्लिम शासन स्थापित करना था। मोहम्मद फराज के पकड़े जाने से अभियान खत्म नहीं हुआ है, बल्कि अभी तो केवल खुलासा हुआ है। पता लगाना बाकी है कि इस मिशन में कितने लोग जुड़ चुके हैं।
शरीफ शिक्षक की छवि बना रखी थी, गरीब मुस्लिम युवाओं को शिकार बनाता था
पड़ोसियों की नजर में फराज एक शरीफ शिक्षक था, लेकिन उसके मोबाइल के भीतर एक काली और हिंसक दुनिया छिपी थी। यह छद्मवेषी अपराधी दिन में बच्चों को ट्यूशन पढ़ाता और रात में सोशल मीडिया के जरिए आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं को आतंक की राह पर धकेलने का काम करता था। जांचकर्ताओं के अनुसार, उसने समाज के भोले-भाले युवाओं को अपना शिकार बनाया ताकि उन्हें चरमपंथी विचारधारा का गुलाम बनाया जा सके। उसकी गिरफ्तारी के बाद, जिस क्लिनिक में वह काम करता था, उसका मालिक भी संदिग्ध परिस्थितियों में फरार हो गया है।
मोहम्मद फराज गुरिल्ला ट्रेनिंग के लिए अफगानिस्तान जाने वाला था
फराज की निशानदेही पर देवबंद से गिरफ्तार किया गया नईम कुरैशी इस पूरे नेटवर्क का असली मास्टरमाइंड और 'हैंडलर' माना जा रहा है। नईम ने ही फराज के भीतर कट्टरपंथ की आग भड़काई और उसे पाकिस्तानी आतंकियों के पदचिन्हों पर चलने के लिए उकसाया। सुरक्षा एजेंसियों ने खुलासा किया है कि यह देशद्रोही गिरोह भारत की संवेदनशील जानकारी विदेशों में भेज रहा था और फराज को गुरिल्ला ट्रेनिंग के लिए अफगानिस्तान भेजने की फिराक में था। इनके पास से आपत्तिजनक साहित्य और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन के सबूत भी मिले हैं।
PFI का मिशन 2047
इस जांच में प्रतिबंधित संगठन PFI के "मिशन 2047" नामक एक खतरनाक दस्तावेज का भी खुलासा हुआ है, जिसे फराज सहेज कर रखे हुए था। इस दस्तावेज में भारत की अखंडता को चुनौती देते हुए सत्ता पर कब्जा करने की बात कही गई है। यह गिरोह सांप्रदायिक शिकायतों को हथियार बनाकर और लोगों के बीच असंतोष पैदा करके मुस्लिम समुदाय को एकजुट करने की साजिश रच रहा था, ताकि भारत की "महिमा" को नष्ट कर वहां अपना वर्चस्व स्थापित किया जा सके।
टारगेटेड किलिंग्स की तैयारी शुरू हो गई थी
फराज के मंसूबे केवल प्रोपेगेंडा तक सीमित नहीं थे; वह टारगेटेड किलिंग्स (लक्षित हत्याओं) और समाज में व्यापक डर पैदा करने की तैयारी कर रहा था। इस आतंकी नेटवर्क ने अपने सदस्यों को पासपोर्ट तैयार रखने का निर्देश दिया था ताकि उन्हें किसी तीसरे देश के रास्ते पाकिस्तान ले जाकर हथियारों की ट्रेनिंग दिलाई जा सके। नईम कुरैशी उसे 'शहीद' बनने के नाम पर आत्मघाती रास्ते पर धकेलने का काम कर रहा था।
एटीएस का मानना है कि फराज एक स्लीपर सेल का हिस्सा था जो एक बड़े नेटवर्क के इशारे पर काम कर रहा था, जिसकी जड़ें भारत के कई राज्यों और विदेशों तक फैली हुई हैं।
news desk MPcg