‘रामायण’ के लक्ष्मण सुनील लहरी ने बच्चों की पढ़ाई पर जताई चिंता, पैरेंट्स को दिए अहम सुझाव

‘रामायण’ के लक्ष्मण सुनील लहरी ने बच्चों की पढ़ाई पर जताई चिंता, पैरेंट्स को दिए अहम सुझाव

लोकप्रिय टीवी सीरियल ‘रामायण’ में लक्ष्मण का किरदार निभाकर घर-घर में पहचान बनाने वाले अभिनेता सुनील लहरी ने देश में स्कूली बच्चों की बदलती मानसिकता और पढ़ाई के प्रति घटते रुझान को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए पैरेंट्स को कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए और बच्चों की शिक्षा को लेकर गंभीर संदेश दिया।

स्कूल खुलते ही बच्चों में उत्साह की कमी पर जताई चिंता

सुनील लहरी ने कहा कि गर्मियों की छुट्टियों के बाद जब स्कूल दोबारा खुलते हैं, तो अधिकतर बच्चों में उत्साह की कमी देखने को मिलती है। उनके अनुसार बच्चे अभी भी “छुट्टी के मूड” में रहते हैं और स्कूल जाने के प्रति उनका रुझान कमजोर दिखाई देता है।

उन्होंने यह भी कहा कि कई बार माता-पिता भी बच्चों को स्कूल छोड़ते समय अनमने रहते हैं, जिससे बच्चों के मन में पढ़ाई को लेकर नकारात्मक भावना बनती है।

‘पढ़ाई को बोझ नहीं, मनोरंजन की तरह समझाएं’

अभिनेता ने अपने संदेश में कहा कि पढ़ाई को बच्चों पर बोझ की तरह नहीं थोपना चाहिए, बल्कि इसे मनोरंजन और सीखने की प्रक्रिया की तरह पेश किया जाना चाहिए।

उन्होंने सुझाव दिया कि:

बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाने की कोशिश की जाए
पढ़ाई को रोचक और इंटरैक्टिव बनाया जाए
घर और स्कूल दोनों जगह सकारात्मक माहौल तैयार किया जाए
पैरेंट्स को दी अहम सलाह

सुनील लहरी ने कहा कि बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि पैदा करने की जिम्मेदारी केवल स्कूलों की नहीं, बल्कि माता-पिता की भी है। उन्होंने कहा कि अगर शुरुआती उम्र (15-18 वर्ष) में बच्चे मेहनत और फोकस से पढ़ाई करते हैं, तो आगे की जिंदगी आसान और सफल हो सकती है।

चेतावनी भी दी

उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर बच्चे शुरुआती समय में ध्यान नहीं देंगे और केवल मौज-मस्ती में समय बिताएंगे, तो आगे चलकर उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

उनके शब्दों में, सही समय पर मेहनत करने से भविष्य बेहतर बनता है, जबकि लापरवाही आगे चलकर पछतावे का कारण बन सकती है।

सोशल मीडिया पर चर्चा

सुनील लहरी के इस बयान को सोशल मीडिया पर काफी लोग साझा कर रहे हैं। कई यूजर्स उनके विचारों से सहमत नजर आए, जबकि कुछ ने कहा कि आज के समय में शिक्षा प्रणाली को भी बच्चों के अनुकूल बनाने की जरूरत है।