आज़मगढ़: देशव्यापी साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़; बैंक के पूर्व कर्मचारी सहित 4 गिरफ्तार, करोड़ों की हेराफेरी का खुलासा

आज़मगढ़: देशव्यापी साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़; बैंक के पूर्व कर्मचारी सहित 4 गिरफ्तार, करोड़ों की हेराफेरी का खुलासा

आज़मगढ़ में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। साइबर सेल और अहरौला थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने एक ऐसे संगठित साइबर ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जो फर्जी बैंक खातों और नकली फर्मों के जरिए देशभर में साइबर फ्रॉड की रकम को घुमाने और ठिकाने लगाने का काम कर रहा था। इस कार्रवाई में गिरोह के चार सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें एक बैंक का पूर्व संविदा कर्मचारी भी शामिल है।

पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह बेहद योजनाबद्ध तरीके से काम करता था। आरोपी ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को कमीशन का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे, जिन्हें तकनीकी भाषा में “म्यूल अकाउंट्स” कहा जाता है। इसके बाद इन खातों से जुड़े दस्तावेज जैसे पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पूरी तरह आरोपियों के कब्जे में ले लिए जाते थे। इन खातों का इस्तेमाल देशभर में चल रहे साइबर ठगी के पैसों को प्राप्त करने, उन्हें कई स्तरों पर ट्रांसफर करने और अंततः नकदी में बदलकर स्रोत छिपाने के लिए किया जाता था।

जांच के दौरान यह भी पता चला कि इस नेटवर्क से जुड़े बैंक खातों के खिलाफ राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर देशभर से कुल 448 शिकायतें दर्ज हैं, जो इस गिरोह की व्यापक गतिविधियों को दर्शाती हैं। पुलिस के अनुसार, एक ही बैंक खाते में मात्र तीन दिनों के भीतर लगभग 40 लाख रुपये का संदिग्ध लेनदेन हुआ था, जो इस नेटवर्क की तेज और बड़े पैमाने की फाइनेंशियल मूवमेंट को उजागर करता है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस खाते में मौजूद करीब 10 लाख रुपये की राशि को फ्रीज कर दिया है।

गिरफ्तार आरोपियों में शामिल पूर्व बैंक संविदा कर्मचारी ने बैंकिंग सिस्टम की आंतरिक प्रक्रियाओं और खामियों का लाभ उठाकर इस पूरे नेटवर्क को तकनीकी सहायता प्रदान की। वहीं अन्य आरोपी अलग-अलग क्षेत्रों में फर्जी खातों के संचालन और साइबर ठगी से प्राप्त धन को विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर उसे कैश में बदलने का काम संभाल रहे थे। पुलिस के मुताबिक यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और देशभर में फैले साइबर अपराधियों के लिए एक तरह की वित्तीय सप्लाई चेन के रूप में काम कर रहा था।

पुलिस ने सभी चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई के बाद जेल भेज दिया है। साथ ही बरामद मोबाइल फोन, बैंक दस्तावेज और डिजिटल डिवाइसेज की फॉरेंसिक जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस का कहना है कि इस नेटवर्क से जुड़े कई अन्य आरोपी अभी फरार हैं, जिनकी तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है। जांच एजेंसियां अब यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि इस गिरोह के तार किन अन्य राज्यों और अंतरराष्ट्रीय साइबर ठग नेटवर्क से जुड़े हुए हैं, जिससे आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे संभव हैं।